Mangal And Shani yuti | Mangal and Shani in 8th house

Mangal And Shani yuti | Mangal and Shani in 8th house

Mars and Satrun in Horoscope

Mangal Shani yuti in Horoscope Hindi- शनि व मंगल दोनों ही ग्रह तेज माने गए हैं। इन ग्रहों को मलेफिक प्लेनेट्स भी कहा जाता है। जातक की कुंडली के हर घर में इन ग्रहों की युति का असर लगभग नकारात्मक ही माना जाता है। इन दोनों ग्रहों को पाप ग्रह भी कहा जाता है। पाप ग्रह से ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि इनका असर नकारात्मक ही होगा। इनकी युति से जातक को परेशानियां घेर लेती हैं और जीवन कष्टकारी होता है इसलिए इन दोनों ग्रहों की युति ठीक नहीं मानी जाती। जहां इनकी युति अशुभ हो तो भाव का फल नहीं मिलता और वहीं शुभ हो तो भाव का फल मिलता है। ये दोनों ग्रह तीव्र होने के कारण आपस में शत्रुता रखते हैं या नकारात्मक रहते हैं। यदि किसी जातक की कुंडली में ये दोनों ग्रह साथ हो तो चाहे शुभ भावों में क्यों न हों नकारात्मक असर ही करते हैं। शनि-मंगल युति जातक के जीवन में परेशानियां ही खड़ी करती हैं। जातक के वैवाहिक जीवन, नौकरी, व्यवसाय, संतान, गृहस्थ जीवन में अचानक ऐसी घटनाएं घट जाती हैं कि जिनका उससे कोई लेना देना भी नहीं होता। जैसे किसी के घर का पालतु जानवर आपके घर में घुस जाना, किसी के घर में झगड़ा हो तो लोग आपके घर लड़ने के लिए आ जाएं, किसी का उधार आपसे मांगा जाए, अचानक विवाह होना, अचानक प्रमोशन, बिना कारण घर बदल लना, नौकरी छूट जाना, कार्यस्थल या शहर-देश से पलायन आदि शनि-मंगल युति के कारण होता है। Remedies For shani Sade Sati

Mangal And Shani in 8th House (hindi)- इस युति के जातक कभी एक जगह पर पक्के तौर पर काम नहीं करते, वे अपनी नौकरी बदलते रहते हैं। कई बार ग्रहों के अनुकूल होने पर भी अच्छे परिणाम नहीं मिलते।  जात के जीवन में 40 वर्ष तक अनियमितताएं ही होती रहती हैं। 36 वर्ष की आयु के बाद कुछ आराम मिलना शुरू तो होता है लेकिन सब धीरे-धीरे से होता है। अस्थिरता की स्थिति बनी रहती है।  वास्तव में 40 की आयु पूरी करने के बाद ही स्थायित्व आ जाता है। मंगल शनि की ये युति नौकरी में भी बाधा डालती है और संतान प्राप्ति में भी परेशानी पैदा करती है। ऐसा देखा ग्या है कि इस युति के कारण जातक को संतान देरी से प्राप्त होती है और बार-बार प्रयास करने पड़ते हैं। जातक को अधरंग  होने की आशंका बनी रहती है। जातक के सातवें भाव में भी यह नकारात्मक परिणाम देती है। परिवार मे विवाद, पति-पत्नी में अनबन रहती है। स्वास्थ्य में कष्ट रहता है और कड़वा व्यवहार भी बन जाता है, वैवाहिक जीवन दुखी बनाता है। इन दोनों की युति shani mangal yuti in 8th house जातक को एक अच्छा डॉक्टर एक सर्जन बनाती है। जातक को तकनीकि क्षेत्र में सफलता मिल सकती है। ऐसा भी देखा गया है कि अष्टम भाव में इनकी युति जातक को परेशान करती रहती है, टेकनिकल लाइन में अच्छी सफलता दिला सकती है। What is Mangal Dosha and Its Remedies ?

अष्टम भाव में स्थित satrun का फल जाने (Saturn in 8th House)- satrun व Mars फल विचार (hindi)

हम शनि व मंगल ग्रहों के बारे में बताते हैं। अष्टम भाव जातक का आयु का भाव होता है। इससे जातक के स्वास्थ्य व आयु के बारे में जानकारी प्राप्त की जाती है। शनि न्याय के देवता हैं और इनका स्वभाव तेज होता है। इसका रंग काला होता है और आवेश में रहते हैं। शनिदेव सूर्य देव के पुत्र हैं लेकिन इनकी अपने पिता से नहीं बनती और इसी कारण उनको अलग किया गया था। अष्टम भाव में शनि जातक को बहादुर बनाता है। जातक का शरीर कुछ भारा व गठा हुआ होता है। जातक अकेला रहना पसंद करता है और समझदार होता है। गुस्से में जल्दी आ जाता है लेकिन शीघ्र ठंडा भी हो जाता है। जातक बहुत चतुर होता है। जातक आलसी भी हो सकता है और हमेशा असंतुष्ट रहने वाला होता है। आप दूसरे के अवगुणों को तो ध्यान में रखते हैं पर अपने स्वभाव व अवगुणों की तरफ कोई ध्यान नहीं जाता। ऐसा भी देखा गया है कि जातक विदेशों में रहता है या अपने जन्मस्थान से बहुत दूर रहता है।

शनि देव जातक की , कुंडली में  12 भावों में विचरण करते हुए प्रभाव डालते रहते हैं। शनिदेव का प्रभाव जीवन पर पड़ता रहता है। जैसा कि पहले ही बताया गया है कि  ज्योतिष में शनिदेव को एक   क्रूर ग्रह माना जाता है, इनके प्रभाव अष्टम भाव में शनि के बलशाली या शुभ होने से अच्छे परिणाम भी मिल सकते हैं। हम आपके विस्तार से बताते हैं कि  शनिदेव जातक की कुंडली के विभिन्न भावों पर किस तरह का प्रभाव डालते हैं –

satrun mars yuti remedies–  शनि मंगल युति को उपाय- मंगल को शक्ति देने वाला ग्रह माना  जाता है। यह जातक के शरीर में ताकत पैदा करता है। जातक के शरीर को स्फूर्ति देता है। जातक किसी भी काम को करने की क्षमता रखता है तो वह मंगल ग्रह के कारण ही होती है। जातक की आंखे बड़ी व लाल होती हैं। वहीं दूसरी तरफ शनि मंगल के विरोधी ग्रह हैं। ये दोनों ग्रह एक साथ हों तो नेगेटिव प्रभाव पैदा करते हैं। शनि जातक को आलसी व भोगी बनाते हैं। किसी भी कार्य को देर करना या टालते रहना शनि का स्वभाव है लेकिन जब किसी काम को करने लगता तो उसे लगातार करते भी रहना। काम की सनक पैदा हो जाए तो काम के पीछे पड़ जाना। ये लक्षण (Saturn planet, shani grah) के होते हैं।

शनि-मंगल युति के उपाय-(शनि मंगल युति उपाय Lal Kitab) जातक को  को धन हानि हो रही हो, घर में बरकत न हो तो, आमदनी से खर्च ज्यादा हो तो घर में नव ग्रह का पूजन करवाएं, हवन करवाते रहने से समस्याओं का समाधान मिल जाता है। 

Mars and satrun ka prabhav

शनि व मंगर ग्रह के स्वभाव में अंतर होता है। यदि हम शनिदेव (shani) सांप मान लें तो मंगल ग्रह (mangal) शेर की तरह होता है। एक तरफ जातक सांप की तरह होता है और दूसरी तरफ जातक का स्वभाव शेर की तरह होता है।  शनि और मंगल की युति (shani mangal yuti) में जातक को सरकारी नौकरी मिलती है। जातक सेना व पुलिस में भर्ती होता है। जातक के स्वभाव में तेजी रहती है, मांसपेशियों में दर्द व खिंचाव से जातक को परेशानी रहती है।  जातक को जहां शनि (shani) समझदार बनाता है तो वहीं मंगल उसे शक्ति प्रदान करता है। समझदारी व शक्ति का सदुपयोग करते हुए जातक आगे बढ़ता है। 

लाल किताब (shani mangal yuti Lal Kitab) के अनुसार जब मंगल के साथ शनि (shani mangal yuti in 7th house in hindi) हो तो मंगल (mangal) की ताकत शनि देव की तरफ शिफ्ट हो जाती है और मंगर प्रभावहीन हो जाता है। ऐसा कह सकते हैं कि मंगल की शक्ति शून्य हो जाती है।

जन्म कुंडली के पहले भाव (mangal shani in 1st house in hindi)

जन्म कुंडली के पहले भाव (mangal yuti in 1st house in hindi) में युति होने के कारण मंगभ की शुभता होती है और जातक को शुभ फल मिलना शुरु हो जाता है। यदि जातक बेरोजगार हो तो उसे नौकरी मिल जाती है और यदि नौकरी में हो तो उसे तरक्की मिल जाती है। इस युति के पहले भाव में होने के कारण जातक स्वाभिमानी हो जाता है और अपने लिए मेहनत करने लगता है। आप कमाई करता है और अपने परिवार को भी सहयोग देता है। वह अजीविका के नए ढंग अपनाता है और इससे उसके ससुराल पक्ष को भी लाभ मिलता है और ससुराल पक्ष भी सहयोग देता है। ऐसा देखा गया है कि जातक की आर्थिक हालत में तेजी से सुधार आता है। ऐसे में जातक को इन दोनों का शुभ फल मिलना तब शुरु होता है जब जातक खुद कमाई करके आजिविका प्राप्त करने लग जाता है।

कुंडली के दूसरे भाव में योग (mangal yuti in 2nd house in hindi)

कुंडली के दूसरे भाव में योग (mangal yuti in 2nd house in hindi) होने पर शादी के बाद जातक का भाग्योदय हो जाता है। उसे  ससुराल पक्ष से लाभ मिलता है और ससुराल पक्ष को भी लाभ मिलता है। विवाह करने के बाद जातक का जीवन सफलता की तरफ तेजी से बढ़ने लगता है। 

जन्म कुंडली के तीसरे भाव (mangal yuti in 3rd house) में इन दोनों के योग होने से जब जातक के लड़की पैदा होने के बाद उसका भाग्योदय होता है। पुत्री के पैदा होने के बाद धन व व्यवसाय में भी वृद्दि होती है। जातक का जीवन खुशहाल होता है।  Lagan Main Shani Ka Phal

जन्म कुंडली के चौथे भाव (shani mangal yuti in 4th house in hindi)

जन्म कुंडली के चौथे भाव (shani mangal yuti in 4th house in hindi) में युति होने पर मंगल की अशुभता पर प्रभाव पड़ता है और यह  कुछ कम असर करती है। इस दौरान यदि जातक  खेतीबाड़ी का काम करे और इसके लिए भूमि का चयन करके खरीदे तो धनवान बन जाता है। इन दोनों ग्रहों के उसे शुभ फल प्राप्त होने शुरु हो जाते हैं। 

जन्म कुंडली के पांचवां भाव (shani mangal yuti in 5th house in hindi) होने के कारण जातक को पुत्र की प्राप्ति होती है। पुत्र का जन्म होने के बाद जातक को सफलता मिलती है और जीवन में वह आगे बढ़ता है। नौकरी व व्यवसाय में भी सफलता मिलती है। 

जन्म कुंडली के 6 भाव shani mangal yuti in 6th house in hindi में ये योग हो यह जातक के लि कष्टकारी होता है। स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता और परिवार में कलह भी रहती है। परिवार में कलह रहती है और संबंध खराब होते हैं। किसी कारण से नौकरी से निकाल दिया जाता है। कारोबार में घाटा पड़ जाता है। इस युति के छठे भाव में होने के कारण जातक को दुर्घटना का भय रहता है।

जन्म कुंडली के सातवें भाव main shani mangal 7th house in hindi

जन्म कुंडली के सातवें भाव shani mangal yuti in 7th house in hindi में ये युति  हो तो जब जातक किसी स्त्री से अवैध शारीरिक सम्बन्ध बना लेता है  | जातक कुंडली के सप्तम भाव में मंगल, शनि, सूर्य, राहू और केतु का होना नकारात्मक प्रभाव देने वाला माना गया है। ऐसे में विवाह में देरी या अड़चने आती हैं। इस भाव में शनि व मंगल की युति होने से जातक की शादी देरी से या आयु अधिक होने पर होती है होती है।  Read More About- Nakshatra ke charan

जन्म कुंडली के अष्ट्म भाव shani mangal yuti in 8th house in hindi में इन दोनों  की युति नकारात्मक फल देती है। जातक का जीवन संघर्षशील रहता है और आयु पर भी यह प्रभाव डालती है।  जातक के जीवन में बहुत परेशानिया सामने आती हैं। जातक को कारावास व दंड भी मिल सकता है। शरीर में अधरंग हो सकता है। 

जन्म कुंडली के नवम भाव shani mangal yuti in 9th house in hindi में इन दोनों ग्रहों की युति जातक के जीवन पर आमतौर पर शुभ प्रभाव डालती है। शादीशुदा लोगों का जीवन शांत रहता है। घर में नवग्रह पूजन, शांति पाठ व हवन करने से सफलता मिलती जाती है और जीवन सुखमय होता है।  नवम भाव में शनि मंगल की युति  दुर्घटना और कारावास का हो सकता है।

कुंडली के दशम भाव, दशम भाव का शनि और मंगल shani mangal yuti in 10th house in hindi में इन दोनों का योग कारोबार, नौकरी पर शुभ प्रभाव डाल सकता है। जातक की शादी होने के बाद उसका भाग्योदय होता है। दशम भाव में मंगल,  शनि और राहु के प्रभाव में आने से जातक का भाग्य कमजोर होता है जिससे शुभ फलों में कमी आती है और जातक मस्त हो जाता है । दशमस्थ मंगल पाप ग्रह शनि के प्रभाव में आने पर मनमौजी बनकर नशों  का शिकार हो जाता है।

जन्म कुंडली के ग्यारवें भाव shani mangal yuti in 11th house in hindi में इन दोनों ग्रहों की युति अक्सर जातक को शुभ फल प्रदान करती है।  जातक अपने पूर्वजों की कमाई पर ही जीवन यापन करता है। ऐसा करने से उसका भाग्योदय होने का रास्ता रुक जाता है। उसे अपने पूर्वजों के कारोबार से अलग अपना कारोबार करना होगा तभी उसका भाग्योदय हो सकता है। परिश्रम करने से भाग्योदय होना शुरू हो जाता है। 

जन्म कुंडली के 12वें भाव shani mangal yuti in 12th house in hindi में  इनका योग शुभ फल ही देता है। जातक को घर में किए हुए हवन करवाते रहना चाहिए जिससे कि  शुभ फल मिलता रहे।

ग्रहों की युतियों का फल important planets conjunctions

ग्रहों भावों के महत्वपूर्ण योग तथा युतियों का फल यहां दिया जा रहा है। जातक की कुंडली के किसी भी घर में 2, 3,  या 4 ग्रहों की युतियां हों तो इनका फल इनके आपसी समान्जस्य व विरोध को देखते हुए किया जाता है। जब दो तीन चार आदि ग्रह एक घर में एकसाथ  हो जाते हैं तो वे अपने स्वभाव, मित्रता, शत्रुता, राशि में स्थिति तथा भाव की स्थिति, तत्व गुण आदि  के अनुसार फल देते  हैं। निम्नलिखित ग्रहों के सामंजस्य से जो फल सूचित कर हो सकते हैं, दिए गए हैं। फल कथन के लिए इन ग्रहों की युवतियों व सामंजस्य को ध्यान रखना आवश्यक है। 

सूर्य-गुरु की युति वाला जातक  मान मर्यादा  वाला होता है। श्रेष्ठ विद्या, उच्च पद तथा यश में वृद्धि करने वाला होता है। निजी चेष्टा द्वारा कामों में सफलता प्राप्त करता है।

सूर्य-बुध की युति- यह युति जातक को विद्या व बुद्धि प्रदान करती है। इस युति वाला जातक सरकारी नौकर होता है और अपनी मेहनत से धन कमाता है। वह उच्च कोटि का ज्योतिष होता है और उसका बचपन कष्ट में बीतता है। 

सूर्य-शुक्र  जातक कला  व साहित्य का प्रेमी होता है। यांत्रिक कला का माहिर होता है। वह अपने  क्रोध पर काबू नहीं पा सकता। उसके प्रेम संबंध बन जाते हैं और गृहस्थ अशांत रहता है। संतान देरी से होती है। जातक को तपेदिक परेशान करता है। पिता के लिए अशुभ होता है। 

सूर्य-गुरु की युति वाला जातक  मान मर्यादा  वाला होता है। श्रेष्ठ विद्या, उच्च पद तथा यश में वृद्धि करने वाला होता है। निजी चेष्टा द्वारा कामों में सफलता प्राप्त करता है।

Call us: +91-98726-65620
E-Mail us: info@bhrigupandit.com
Website: http://www.bhrigupandit.com
FB: https://www.facebook.com/astrologer.bhrigu
Pinterest: https://in.pinterest.com/bhrigupandit588/
Twitter: https://twitter.com/bhrigupandit588

Tags- कन्या लग्न में मंगल शनि युति, शनि मंगल युति इन थर्ड हाउस, शनि मंगल युति उपाय lal kitab, दशम भाव का शनि और मंगल, दूसरे भाव में मंगल शनि की युति, मंगल शनि की युति धनी, मंगल की दृष्टि शनि पर, कर्क लग्न में शनि मंगल की युति

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow my blog with Bloglovin
Open chat
1
hello, how can i help you ?