नक्षत्रों के चरण तथा इनके चरणाक्षर

नक्षत्रों के चरण तथा इनके चरणाक्षर

October 13, 2018

                                                                                 
Nakshatron ke charan- नक्षत्रों के चरण तथा इनके चरणाक्षर

ज्योतिषशास्त्र ने आसानी से समझने के लिए हर नक्षत्र के चार-चार भाग किए हैं, जिन्हें प्रथम चरण, दूसरा चरण, तृतीय चरण व चतुर्थ चरण का नाम दिया गया है।
नक्षत्रों के चरणाक्षर
हरेक नक्षत्र के जो 4-4 चरण होते हैं, उनमें से प्रत्येक नक्षत्र के प्रत्येक चरण को एक-एक नक्षत्र ज्योतिष शास्त्र ने निर्धारित कर दिया है जिस नक्षत्र के जिस चरण में जिस व्यकित का जन्म होता है, उसका नाम उसी जन्मकालीन नक्षत्र के चरणाक्षर पर रखा जाता है। उदाहरण के लिए यदि किसी भी व्यक्ति का जन्म अश्विनी नक्षत्र के दूसरे चरण में होता है तो  उसका नाम इसी नक्षत्र के दूसरे चरण के अक्षर चे से रखा जाएगा। जैसे चेतन्य, चेतक, चेरम आदि। किस नक्षत्र के कौन कौन से अक्षर होते हैं इसे इस टेबल के अनुसार अच्छी तरह से समझा जा सकता है। Nakshatron ke charan

nakshatra chart
nakshatra chart

नक्षत्र के अनुसार नामकरण Nakshatron ke charan

जिस नक्षत्र के चरण में बच्चे का जन्म हुआ होता है उसी चरण के अक्षर पर नामकरण करने का विधान है। उसी अक्षर पर नामकरण किया जाता है। जिस तिथी पर बच्चे का जन्म होता है उस दिन का पंचांग हम देखेंगे। उस दिन जिस नक्षत्र या राशि पर चंद्रमा होगा उसी के अनुसार बच्चे का नाम रखा जाएगा। पंचाग में नक्षत्र कब शुरु हुआ उसका समय लिखा होता है और उस समय को हम चार भागों में बांट सकते हैं। मान लो बच्चे का जन्म दिन के 12 बजे हुआ है और उस दिन भरणी नक्षत्र था। जो सुबह 10 बजे से शुरु था। हर नक्षत्र चरण लगभग 6 घंटे का होता है। यानि 3 बजे तक भरणी का प्रथम चरण था। बच्चे का जन्म 3 बजे के बाद हुआ तो दूसरा चरण और रात्रि 8 बजे के बाद तीसरा तथा रात्रि 1 बजे के बाद चौथा चरण शुरु होगा। आप अधिक जानकारी के लिए पंचांग देखें यदि आपको फिर भी नामकरण के बारे में कोई संशय हो तो आप ज्योतिषी से सलाह ले सकते हैं। राशि के अनुसार नामाक्षर भी तालिका में दिए गए हैं। Nakshatron ke charan नक्षत्र लिस्ट-:

नक्षत्र -Constellation चरणाक्षर – 1st Letter  वश्य – Vashya योनि -Yoni गण -Gana नाड़ी -Nadi
अश्विनी चू,चे,चो,ला चतुष्पद अश्व देव आदि
भरणी ली,लू,ले,लो चतुष्पद गज मनुष्य मध्य
कृत्तिका अ,इ,उ,ए चतुष्पद मेढ़ा राक्षस अन्त्य
रोहिणी ओ,वा,वी,वू चतुष्पद सर्प मनुष्य अन्त्य
मृगशिरा वे,वो,का,की पहले दो चरण चतुष्पद,बाद के दो चरण मनुष्य सर्प् देव मध्य
आर्द्रा कु,घ,ड़,छ् मनुष्य श्वान मनुष्य अदि
पुनर्वसु के,को,हा,ही पहले तीन चरण मनुष्य, बाद का एक चरण जलचर मार्जार देव आदि
पुष्य हू,हे,हो,डा जलचर मेढा देव मध्य
अश्लेषा डी,डू,डे,डो जलचर मार्जार राक्षस अन्त्य
मघा मा,मी,मू,मे चतुष्पद मूषक राक्षस अन्त्य
पूर्वाफाल्गुनी मो,टा,टी,टू चतुष्पद मूषक मनुष्य मध्य
उत्तराफाल्गुनी टे,टो,पा,पी पहला चरण चतुष्पद, बाकी तीन मनुष्य गौ मनुष्य आदि
हस्त पू,ष,ण,ठ मनुष्य महिष देव आदि
चित्रा पे,पो,रा,री मनुष्य व्याघ्र राक्षस मध्य
स्वाती रू,रे,रो,ता मनुष्य महिष देव अन्त्य
विशाखा ती,तू,ते,तो पहले तीण चरण मनुष्य, बाद का एक चरण कीट व्याघ्र राक्षस अन्त्य
अनुराधा ना,नी,नू,ने कीट मृग देव मध्य
ज्येष्ठा नो,या,यी,यू कीट मृग राक्षस आदि
मूल ये,यो,भा,भी मनुष्य श्वान राक्षस आदि
पूर्वाषाढ़ा भू,ध,फ,ढ़ पहले दो चरण मनुष्य, बाद के दो चरण चतुष्पद वानर मनुष्य मध्य
उत्तराषाढ़ा भे,भो,जा,जी चतुष्पद नकुल मनुष्य अन्त्य
अभिजित जु,जे,जो,ख कोई नहीं है नकुल कोई नहीं कोई नहीं
श्रवण खी,खू,खे,खो पहले दो चरण चतुष्पद, बाद के दो चरण जलचर वानर देव अन्त्य
धनिष्ठा गा,गी,गू,गे पहले दो चरण जलचर, बाद के दो चरण मनुष्य सिंह राक्षस मध्य
शतभिषा गो,सा,सी,सू मनुष्य अश्व राक्षस आदि
पूर्वाभाद्रपद से,सो,दा,दी पहले तीन चरण मनुष्य,बाद का एक चरण जलचर सिंह मनुष्य आदि
उत्तराभाद्रपद दू,थ,झ,ण जलचर गौ मनुष्य मध्य
रेवती दे,दो,चा,ची जलचर गज देव अन्त्य

Nakshtra Chart

भारतीय ज्योतिष में नक्षत्रों का ग्रहों के समान ही विशेष महत्व है। आकाश मंडल में 27 नक्षत्र हैं जिनके विभिन्न आकार हैं ये आकार पशु पक्षियों की तरह भी प्रतीत होते हैं। ये 27 नक्षत्र हैं। ये सभी नक्षत्र इनमें जन्म लेने वाले जातकों के जीवन में बहुत ही बड़ा प्रभाव डालते हैं। ऐसा भी माना जाता है कि पुराणों में इन नक्षत्रों को दक्ष प्रजापति की पुत्रियां माना जाता है। जिस नक्षत्र में जातक जन्म लेता है उस नक्षत्र का उसके जीवन में प्रभाव रहता है। किसी भी नक्षत्र में जन्म लेने वाला जातक उस नक्षत्र के गुण-दोष के अनुसार ही होता है। हर मनुष्य का स्वभाव, गुण-धर्म, जीवन शैली जन्म नक्षत्र से जुड़ी है ऐसा भारतीय ज्योतिषियों का मानना। जिस नक्षत्र में जातक जन्म लेता है वही नक्षत्र उसके स्वभाव और जीवन पर भी अपना असर छोड़ता है।

nakshatra ke charan
nakshatra ke charan

नक्षत्र किसे कहा जाता है ? What is Nakshatra?

Nakshatron ke charan- भारतीय ज्योतिष में नक्षत्र के सिद्धांत स्पष्ट तौर पर बताए गए हैं। नक्षत्र के सिद्धांत प्रमाणित व अचूक हैं। आपको पता होगा कि चन्द्रमा 27.3 दिन में पृथ्वी की एक परिक्रमा पूरी करता है। इस एक मासिक चक्र के दौरान चन्द्रमा जिन मुख्य सितारों के समूहों के बीच से गुजरता है, इन्ही तारों के समूह को नक्षत्र कहा जाता है। जब चन्द्रमा पृथ्वी की एक परिक्रमा कर रहा होता है तो इस दौरान वह जिन तारा समूहों के पास से होकर गुजरता है, में 27 विभिन्न तारा-समूह बनते हैं। इन्ही तारों के विभाजित समूह को नक्षत्र या तारामंडल कहा जाता है। प्रत्येक नक्षत्र एक विशेष तारामंडल या तारों के एक समूह का प्रतिनिधि‍ होता है। इस प्रकार यह भी कहा जा सकता है कि नक्षत्रों तारों का समूह है। हर नक्षत्र विशेष प्रकार की आकृति बनाता है या आकृति में है।

जिस प्रकार प्राचीन काल में ज्योतिषियों व गणनाकारों ने राशियों को सरलता से समझने के लिए इनको 12 भागों में बाँट दिया था, इसी प्रकार आकाश को 27 नक्षत्रों में। इन नक्षत्रों की गणना ज्योतिष में महत्वपूर्ण है। एक नक्षत्र को एक सितारे के समान समझा जा सकता है। सभी नक्षत्रों को 4 पदों में या 3 डिग्री और 20 मिनट के अन्तराल में बांटा गया है। आकाश मंडल के 9 ग्रहों को 27 नक्षत्रों का अर्थात हर ग्रह को तीन नक्षत्रों का स्वामि‍त्व प्राप्त है। इस प्रकार प्रत्येक राशि में 9 पद शामिल हैं। चंद्रमा का नक्षत्रों से मिलन ‘नक्षत्र योग’ और ज्योतिष को ‘नक्षत्र विद्या’ भी कहा जाता है।

सबसे खराब नक्षत्र कौन सा है- सबसे खराब व परेशानी देने वाला नक्षत्र मूल को माना जाता है।  अश्विनी, अश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूल एवं रेवती नक्षत्र को (गंडमूल) नक्षत्र कहा जाता है। इन नक्षत्रों के समय जन्म लेने वाले जातक स्वयं तथा अपने माता-पिता, मामा आदि के लिए कष्टदायक बताएं गए हैं।   

Read More click this link –मूल नक्षत्र कौन-कौन से हैं इनके प्रभाव क्या हैं और उपाय कैसे होता है- Gand Mool 2021

Nakshtra charan- नक्षत्र का एक चरण कितने घंटे का होता है?

 जैसा कि हम जानते हैं कि हर नक्षत्र को 4 भागों में बांटा गया है। ऐसा कह सकते हैं कि एक नक्षत्र के चार चरण होते हैं। नक्षत्र के चरण को पाद भी कहा जाता है। हर चरण का मान 130- 20′ ÷ 4 = 3 अंश 20 कला होता है। इस प्रकार हम जान सकते हैं कि 27 गुणा 4 बराबर है 108 यानि 27 नक्षत्रों में कुल 108 चरण होते हैं। इस प्रकार प्रत्येक राशि में 108 ÷ 12 = 9 चरण होंगे। हम जानते हैं कि चंद्र लगभग 27 दिन 7 घंटे 43 मिनट में पृथ्वी की नाक्षत्रिक परिक्रमा करता है या पृथ्वी का चक्कर लगाता है। नक्षत्रों की कुल संख्या भी 27 ही है। इस प्रकार चंद्र लगभग 1 दिन (60 घटी या 24 घंटे) या लगभग 24 घंटे में एक नक्षत्र का भोग करता है। एक दिन में 24 घंटे होते हैं और एक नक्षत्र में 4 चरण होते हैं। इस प्रकार 24 घंटों को 4 तो एक नक्षत्र का चरण लगभग 6 घंटे का होता है। चंद्रमा कम गति के कारण  एक नक्षत्र को अपनी कम गति से पार करने में लगभग 67 घटी का समय लेता है  तथा अपनी अधिकतम गति से पार करने में लगभग 52 घटी का समय ले सकता है। एक घटी 24 मिनट के समान होती है।

What is Gandmool in astrology? in English

27 नक्षत्र इस प्रकार है – सभी नक्षत्रों का 0 डिग्री से लेकर 360 डिग्री नामकरण किया गया है

1.अश्विनी 2. भरणी 3. कृत्तिका 4. रोहिणी 5 मृगशिरा, 6. आद्रा, 7.पुनर्वसु, 8.पुष्य,9. अश्लेशा, 10. मघा, 11. पूर्वाफाल्गुनी, 12. उत्तराफाल्गुनी, 13.हस्त, 14. चित्रा, 15. स्वाति, 16.विशाखा, 17.अनुराधा, 18.ज्येष्ठा, 19 मूल, 20.पूर्वाषाढा, 21. उत्तराषाढा, 22. श्रवण, 23. धनिष्ठा, 24. शतभिषा, 25. पूर्वाभाद्रपद, 26. उत्तराभाद्रपद और 27. रेवती।

27 नक्षत्रों की विशेषताएं और उनका जातकों के गुण एवं स्वभाव पर प्रभाव, (27 Nakshatras)

1 अश्वनी नक्षत्र- अश्विनी नक्षत्र संपूर्ण फलादेश राशि चक्र में 00 अंश 13 अंश 20 कला के विस्तार वाला क्षेत्र अश्विनी नक्षत्र कहलाता है। अश्विनी नाम दो अश्विन से बना है। ग्रीक में इसको कस्टर और पोलुक्स, अरब मंजिल में अल शरतैन, चीन के सियु में ल्यु कहते हैं। कालब्रुक और बाद की धरणाओं के अनुसार अश्विनी नक्षत्र दो अश्व मुख के प्रतीक तीन तारों का समूह है। देवता-अश्विनी कुमार स्वामी-केतु राशि-मेष 00 अंश से 13 अंश 20 कला भारतीय खगोल में अश्विनी प्रथम नक्षत्र है। मुहूर्त ज्योतिष में इसे लघु क्षिप्र नक्षत्र कहते हैं। अश्निवी की जाति वैश्य, योनि अश्व, योनि वैर महिष गण देव, नाड़ी आदि है। जातक जीवन में शीध्र उन्नति करता है। जातक हठी, शांत, निश्चल, कार्य को अगोचर रूप से करने वाला होता है। ये लक्षण 14 से 20 अप्रेल अश्विनी में उच्च का सूर्य और 14 से 28 अक्टूम्बर स्वाति में नीच का सूर्य मे विशेष परिलक्षित होते हैं।

Nakshatron ke charan, प्रत्येक चरण में तीन ग्रह का प्रभाव होता है-

1- राशि स्वामी,

2- नक्षत्र स्वामी,

3- चरण स्वामी।
अश्विनी नक्षत्र का प्रथम चरण- इसमे मंगल, केतु और मंगल का प्रभाव है। सूर्य पर शनि की दृष्टि हो, तो जातक निर्धन और कार्य मे उसका मन नही होता है। अश्विनी सूर्य चरण फल प्रथम चरण – जातक वाकपटु, आत्मविश्वासी, उत्साही, शासकीय संस्था में उच्च पदासीन, समाज में शक्तिशाली, तीर्थयात्री, स्पष्टवादी होता है।
अश्विनी नक्षत्र का द्वितीय चरण- जातक छोटी उम्र मे धनवान हो जाता है किन्तु क़ानूनी उलझन में धन खोना पड़ता है। विदेश में रहने पर निर्धन और अस्वस्थ, शासकीय सहायता प्राप्त होता है। परिवार में विरोधाभास होता है।
अश्विनी नक्षत्र का तृतीय चरण – जातक धनवान किन्तु समाज मे प्रतिष्ठाहीन, कृषि से सम्पत्तिवान, सम्पदा-जमीन-जायदाद का दलाल, कर्मठ, स्व परिश्रम से व्यवसाय में उन्नत, साधारण स्वस्थ होता है। इसका पिता क़ानूनी मामले में धन खोने वाला होता है।
अश्विनी नक्षत्र चतुर्थ चरण- जातक आध्यात्मिक और दैविक ज्ञानी, कृषि से सम्पत्तिवान, परिवार प्रिय, सेनाध्यक्ष या नेता अत्यधिक धनी नही पर समाज में प्रतिष्ठित, यात्रा प्रेमी, दानी, भूखो को निशुल्क आहार कराने वाला होता है। अश्विनी नक्षत्र के अक्षर- चू,चे,चो,ला

Gandmool Nakshtras Dates 2021

  1. अश्विनी नक्षत्र का व्यक्तित्व पर प्रभाव:- नक्षत्रों की कुल संख्या 27 है। विशेष परिस्थिति में अभिजीत को लेकर इनकी संख्या 28 हो जाती है। गोचरवश नक्षत्र दिवस बदलता रहता है। हर नक्षत्र का अपना प्रभाव होता है। जिस नक्षत्र में जातक का जन्म होता है। उसके अनुसार ही उसका व्यक्तित्व, व्यवहार और आचरण हो सकता है। इन नक्षत्रों में सबसे पहला नक्षत्र अश्विनी है। अश्विनी नक्षत्र को गण्डमूल नक्षत्र है। इस नक्षत्र का स्वामी केतुदेव हैं। इस नक्षत्र में उत्पन्न होने वाले व्यक्ति बहुत ही उर्जावान होते हैं। सदैव सक्रिय रहना पसंद करते हैं। इन्हें खाली बैठना अच्छा नहीं लगता, ये हमेशा कुछ न कुछ करते रहना पसंद करते हैं। इन्हें बड़े और महत्वपूर्ण काम करने में मज़ा आता है। अश्विनी नक्षत्र में जिनका जन्म होता है वे रहस्यमयी होते हैं। इन्हें समझ पाना काफी मुश्किल होता है। ये जो भी हासिल करने की सोचते हैं उसे पाने के लिए किसी भी हद तक जाने से नहीं डरते। ये इस प्रकार के कार्य कर जाते हैं जिसके बारे में कोई अंदाज़ा भी नहीं लगा पाता। इनमें उतावलापन बहुत होता है। बहुत जल्दी गुस्सा करते हैं। ये काम को करने से पहले नहीं सोचते अपितु बाद में उस पर विचार करते हैं। ये अपने शत्रुओं से बदला लेने में ये पीछे नहीं हटते। अपने दुश्मनों को पराजित करना इन्हें आता है। जातक को दबाव या ताकत से वश में नहीं किया जा सकता। ये प्रेम एवं अपनत्व से ही वश में आते हैं। इनका जीवन संघर्ष में गुजरता है । इनके अच्छे मित्र होते हैं। जातक अक्सर छल कपट से दूर ही रहते हैं। ये मित्रता निभाते हैं। बाहर से सख्त दिखते हैं परंतु भीतर से कोमल हृदय के होते हैं। अपनी धुन के पक्के होते हैं, जो भी तय कर लेते हैं उसे पूरा करके दम लेते हैं। ज्योतिष शास्त्र में सबसे प्रमुख और सबसे प्रथम अश्विन नक्षत्र को माना गया है। अश्वनी नक्षत्र में जन्मे जातक सामान्यतः सुन्दर ,चतुर, सौभाग्यशाली एवं स्वतंत्र विचारों वाले और आधुनिक सोच के लिए मित्रों में प्रसिद्ध होते हैं। इस नक्षत्र में जन्मा व्यक्ति बहुत ऊर्जावान होने के सथ-साथ हमेशा सक्रिय रहता है। इनकी महत्वाकांक्षाएं इन्हें संतुष्ट नहीं होने देतीं। ये लोग सभी से बहुत प्रेम करने वाले, हस्तक्षेप न पसंद करने वाले, रहस्यमयी प्रकृत्ति के होते हैं। ये लोग अच्छे जीवनसाथी और एक आदर्श मित्र साबित होते हैं।
  2. भरणी नक्षत्र के जातक का व्यक्तित्व- भरणी नक्षत्र का स्वामी शुक्र ग्रह होता है, जिसकी वजह से इस नक्षत्र में जन्में लोग एक दृढ़ निश्चयी, चतुर, सदा सत्य बोलने वाले, आराम पसंद और आलीशान जीवन जीने वाले होते हैं। ये लोग काफी आकर्षक और सुंदर होते हैं, इनका स्वभाव लोगों को आकर्षित करता है। इनके अनेक मित्र होंगे और मित्रों में बहुत अधिक लोकप्रिय भी होंते है। इनके जीवन में प्रेम सर्वोपरि होता है और जो भी ये ठान लेते हैं उसे पूरा करने के बाद ही चैन से बैठते हैं। इनकी सामाजिक प्रतिष्ठा और सम्मान हमेशा बना रहता है। नक्षत्रों की कड़ी में भरणी को द्वितीय नक्षत्र माना जाता है। जो व्यक्ति भरणी नक्षत्र में जन्म लेते हैं वे सुख सुविधाओं एवं ऐसो आराम चाहने वाले होते हैं। इनका जीवन भोग विलास एवं आनन्द में बीतता है। ये देखने में आकर्षक व सुन्दर होते हैं। इनका स्वभाव भी सुन्दर होता है जिससे ये सभी का मन मोह लेते हैं। इनके जीवन में प्रेम का स्थान सर्वोपरि होता है। इनके दिल में प्रेम तरंगित होता रहता है तथा विपरीत लिंग वाले व्यक्ति के प्रति आकर्षण एवं लगाव रखते हैं। भरणी नक्षत्र के जातक उर्जा से परिपूर्ण रहते हैं। ये संगीत, नृत्य, चित्रकला आदि में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं। ये दृढ़ निश्चयी एवं साहसी होते हैं। इस नक्षत्र के जातक जो भी दिल में ठान लेते हैं उसे पूरा करके ही दम लेते हैं। आमतौर पर ये विवाद से दूर रहते हैं फिर अगर विवाद की स्थिति बन ही जाती है तो उसे प्रेम और शान्ति से सुलझाने का प्रयास करते हैं। अगर विरोधी या विपक्षी बातों से नहीं मानता है तो उसे अपनी चतुराई और बुद्धि से पराजित कर देते हैं। भरणी के जातक अपनी विलासिता को पूरा करने के लिए प्रयासरत रहते हैं। इनका हृदय कवि के समान होता है। ये किसी विषय में दिमाग से ज्यादा दिल से सोचते हैं। ये नैतिक मूल्यों का आदर करने वाले और सत्य का पालन करने वाले होते हैं। ये रूढ़िवादी नहीं होते हैं और न ही पुराने संस्कारों में बंधकर रहना पसंद करते हें। ये स्वतंत्र प्रकृति के एवं सुधारात्मक दृष्टिकोण रखने वाले होते हैं। इन्हें झूठा दिखावा व पाखंड पसंद नहीं होता। पत्नी गुणवंती और देखने व व्यवहार मे सुन्दर होती हैं। भरणी नक्षत्र के अक्षर- ली,लू,ले,लो
  • 3. कृत्तिका नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक- नक्षत्रों की गणना में तीसरे स्थान पर रहने वाले नक्षत्र कृतिका का सूर्यदेव स्वामी माना जाता है । जातक पर सूर्य का प्रभाव रहता है। सूर्य के प्रभाव के कारण ये आत्मसम्मान से परिपूर्ण होते हैं। ये स्वाभिमानी होंते हैं और तुनक मिज़ाज भी, छोटी-छोटी बातों पर ये उत्तेजित हो उठते हैं और गुस्से से लाल पीले होने लगते हैं। ये उर्जा से परिपूर्ण होते हैं और दृढ़ निश्चयी होते हैं। लगनशील होते हैं, जिस काम को भी अपने जिम्मे लेते हैं उसमें परिश्रम पूर्वक जुटे रहते हैं। ये नियम के भी पक्के होते हैं । नौकरी में अधिक कामयाब होते हैं। मित्रता का दायरा बहुत छोटा होता है क्योंकि ये लोगों से अधिक घुलते मिलते नहीं हैं परंतु जिनसे मित्रता करते हैं। प्रेम सम्बन्धों के मामले से दूर रहना पसंद करते हैं। इनकी संतान कम होती है, परंतु पहली संतान गुणवान व यशस्वी होती है। पत्नी से इनके सम्बन्ध सामान्य रहते हैं। ये लोग जिस भी काम को अपने हाथ में लेते हैं उसे पूरी लगन और मेहनत के साथ पूरा करते हैं। कृतिका नक्षत्र के चरण कृतिका नक्षत्र के अक्षर- अ,इ,उ,ए
  • 4. रोहिणी नक्षत्र के जातक- रोहिणी नक्षत्र का स्वामी चंद्रमा है। जातक काफी कल्पनाशील और रोमांटिक स्वभाव के होते हैं। ये लोग काफी चंचल स्वभाव के होते हैं और एक जगह पर ये टिक नहीं सकते। कभी एक ही मुद्दे पर टिके नहीं रहते।जातक दूसरों में गलतियां ढूँढता रहता है। दूसरों की गलतियों के बारे में चर्चा करना और उनका मजाक उड़ाना ही इन्हें पसंद होता है। दूसरों को चिढ़ाने में ये लोग बहुत ही मजा लेते हैं। कई बार ये लोग हद से बाहर भी हो जाते हैं।स मिलनसार, सभी सुख-सुविधाओं को पाने की कोशिश भी करते रहते हैं। रोहिणी चारों चरणों में वृषभ राशि में होता है। ये कल्पना की ऊंची उड़ान भरने वाले होते हैं। मन हिरण के समान चंचल होता है। संगीत, नृत्य, चित्रकारी, शिल्पकला आदि में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं। जीवन सुखमय रहता है, ये सभी प्रकार के सांसारिक सुखों का आनन्द लेते हैं। जीवन में निरंतर आगे की ओर बढ़ते रहते हैं। उच्च पद तक जाते हैं। जीवन रोमांस से भरपूर होता है। यात्रा करना, सैर सपाटा करना काफी अच्छा लगता है। इनके बच्चे समझदार और नेक गुणों वाले होते हैं। रोहिणी नक्षत्र के नाम अक्षरओ,वा,वी,वू
  • 5. मृगशिरा नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक का व्यक्तित्व- nakshatron ke charan
    मृगशिरा पांचवां नक्षत्र है, मंगलदेव का प्रभाव रहता है। मृगशिरा नक्षत्र का स्वामी मंगलदेव है। जातक दृढ़ निश्चयी होते हैं ये स्थायी काम करना पसंद करते हैं, ये जो काम करते हैं उसमें हिम्मत और लगन पूर्वक जुटे रहते हैं। ये आकर्षक व्यक्तित्व और रूप के स्वामी होते हैं। इनका हृदय निर्मल और पवित्र होता है। मानसिक तौर पर बुद्धिमान होते और शारीरिक तौर पर तंदरूस्त होते हैं। इनके स्वभाव में उतावलापन रहता है जिसकारण आशा के अनुरूप इन्हें परिणाम नहीं मिल पाता है। संगीत के शौकीन होते हैं। व्यक्तिगत जीवन में ये अच्छे मित्र साबित होते हैं। वैवाहिक जीवन बहुत ही सुखमय होता है क्योंकि ये प्रेम में विश्वास रखने वाले होते हैं। जातक बहादुर होते हैं ये जीवन में आने वाले उतार चढ़ाव को लेकर सदैव तैयार रहते हैं। मंगल का प्रभाव होने की वजह से ये लोग स्वभाव से काफी साहसी, दृढ़ निश्चय चतुर, अध्ययन में अधिक रूचि, माता पिता के आज्ञाकारी और सदैव साफ़ सुथरे आकर्षक वस्त्र पहनने वाले होते हैं। ये लोग स्थायी जीवन जीने में विश्वास रखते हैं और हर काम पूरी मेहनत के साथ पूरा करते हैं। मृगशिरा नक्षत्र के नाम अक्षर- वे,वो,का,की  

    6. आर्द्रा नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक का व्यक्तित्व- आर्द्रा नक्षत्र की राशि मिथुन है। जीवनभर राहु और बुध का प्रभाव रहता है। जातक राजनीति में अव्वल होते हैं और चतुराई से अपना मकसद पूरा करना जानते हैं। मधुर वाणी और वाकपटुता से ये लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर लेते हैं। इस नक्षत्र के जातक का मस्तिष्क हमेशा क्रियाशील और सक्रिय रहता है। ये लोग सफलता हेतु साम, दाम, दण्ड, भेद की नीति भी खुल कर अपनाते हैं। आम तौर पर प्रत्यक्ष रूप से राजनीति में सक्रिय रहते हैं और अगर प्रत्यक्ष रूप से न भी रहें तो अप्रत्यक्ष रूप से राजनीतिक हलकों में इनकी अच्छी पकड़ रहती है, ये राजनेताओं से अच्छे सम्बन्ध बनाकर रखते हैं। समाज में इनकी छवि बहुत अच्छी नहीं रहती और लोग इनके लिए नकारात्मक विचार रखने लगते हैं।
अपने आस-पास की घटनाओं के बारे में जागरूक और व्यापार करने की समझ इनकी महान विशेषता है। ये लोग इतने शातिर होते हैं कि सामने वाले के दिमाग में क्या चल रहा है उसे तुरंत जान लेते हैं। इन्हें आसानी से छला नहीं जा सकता। जातक निजी स्वार्थ को पूरा करने के लिए नैतिकता को भी छोड़ देते हैं।

  • आर्द्रा नक्षत्र का प्रथम चरण-  आर्द्रा नक्षत्र के प्रथम चरण में पैदा हुआ जातक बहुत ही जिज्ञासु होता है। वह जीवन में गुप्त विद्याओं को जानने में लगा रहता है।  इसका पहला पद गुरु यानि बृहस्पति की तरफ से शासित होता है और यह धनु के नवांश में पड़ता है। जातक बहुत ज्यादा भौतिकवादी हो सकता है जिस कारण वह व्यसनों का भी शिकार हो सकता है। इस चरण में ग्रह कमजोर या शिथिल रहते हैं जो जातक के व्यक्तित्व पर प्रभाव डालते हैं। 
  • आर्द्रा नक्षत्र का दूसरा चरण- इस चरण में नकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। जीवन में उथल-पुथल रहती है। जातक को पता नहीं चलता कि कौन सा निर्णय सही है और कौन सा गलत। जातक अपनी महत्वकांक्षाओं व कुंठाओं से ग्रसित रह सकता है। जीवन में संघर्ष व तूफानों का सामना करता है। इस नक्षत्र की दूसरी तिमाही होती है और यह मकर नवांश में शनिदेव द्वारा शासित होती है। इस चरण में पैदा होने वाले जातकों में अक्सर नकारात्मक ऊर्जा दिखाई देती है।
  • आर्द्रा नक्षत्र का तीसरा चरण-  इस चरण में पैदा हुआ जातक तेज दीमाग वाला, साहसी व आगे बढ़ने वाला होता है। ऐसे लोग वैज्ञानिक दीमाग रखने वाले होते हैं और नई चीजों का अविष्कार करते रहते हैं। यह पद शनिदेव द्वारा शासित होता है और कुम्भ नवांश में पड़ता है। जातक अचानक कहीं से प्रेरणा पाता है और तेजी से आगे निकल जाता है। यह रेस में पीछे रहकर भी अंत में तेजी से आगे निकल कर रेज जीत जाता है। 
  • आद्रा नक्षत्र का चौथा चरण- इस चरण में पैदा हुआ जातक करुणा व दया से भरा होता है। उससे किसा का भी दुख देखा नहीं जाता। एक शांत समुद्र की तरह होता है जिसमें ज्वारभाटे आते रहते हैं।  सकारात्मक ऊर्जा से भरा इंसान लोगों की मदद करने को तैयार रहता है। यह पद गुरु द्वारा शासित होता है ओर मीन नवांश में पड़ता है। इसका उच्च व्यक्तित्व होता है और दूसरों के लिए प्रेरणा व आदर्श होता है।   आर्द्रा नक्षत्र के नाम अक्षर- कु,घ,ड़,छ्
  • 7. पुनर्वसु नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक का व्यक्तित्व- जातक में कुछ दैवीय शक्ति होती है। स्मरण क्षमता काफी अच्छी होती है, ये एक बार जिस चीज़ को देख या पढ़ लेते हैं उसे लम्बे समय तक अपनी यादों में बसाये रखते हैं। पुनर्वसु के जातक की अन्तदृष्टि काफी गहरी होती है। काफी मिलनसार होते हैं, ये सभी के साथ प्रेम और स्नेह के साथ मिलते है, इनका व्यवहार सभी के साथ दोस्ताना होता है। आर्थिक मामलों के अच्छे जानकार होते हैं। सरकारी क्षेत्र में भी उच्च पद प्राप्त होता है। बच्चे शिक्षित,समझदार होते हैं, ये जीवन में कामयाब होकरउच्च स्तर का जीवन प्राप्त करते हैं। पुनर्वसु नक्षत्र के नाम अक्षर- के,को,हा,ही
  • 8. पुष्य नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक का व्यक्तित्व- शनिदेव के प्रभाव वाले पुष्य नक्षत्र को सबसे शुभ माना गया है। पुष्य नक्षत्र का स्वामी शनि है। पुष्य नक्षत्र को शुभ माना गया है। वार एवं पुष्य नक्षत्र के संयोग से रवि-पुष्य जैसे शुभ योग का बनना होता है। जातक को बाल्यावस्था में काफी मुश्किलों एवं कठिनाईयों से गुजरना पड़ता है। कम उम्र में ही विभिन्न परेशानियों एवं कठिनाईयों में से गुजरना पड़ता है। इस कारण युवावस्था में ही परिपक्व हो जाते हैं। जातक मेहनत और परिश्रम से कभी पीछे नहीं हटते। अपने काम में जुटे रहते हैं। ये अध्यात्म में काफी गहरी रूचि रखते हैं और ईश्वर भक्त होते हैं। विपरीत लिंग वाले व्यक्ति के प्रति काफी लगाव व प्रेम रखते हैं। लम्बी यात्राओं व भ्रमण के शौकीन होते हैं। जीवन में धीरे-धीरे तरक्की करते जाते हैं।पुष्य नक्षत्र में पैदा लेने वाले व्यक्ति अपनी मेहनत और लगन से जीवन में आगे बढ़ते हैं। पुष्य नक्षत्र के नाम अक्षर हू,हे,हो,डा
  • 9 अश्लेषा नक्षत्र
  • आश्लेषा नक्षत्र यह नक्षत्र नेगेटिव एनर्जी वाला माना जाता है। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्तियों के भीतर भी विष की थोड़ी बहुत मात्रा अवश्य पाई जाती है। लग्न स्वामी चन्द्रमा के होने के कारण ऐसे जातक उच्च श्रेणी के चितित्सक , वैज्ञानिक या अनुसंधानकर्ता भी होते हैं। अश्लेषा नक्षत्र में जन्मे व्यक्तियों का प्राकृतिक गुण सांसारिक उन्नति में प्रयत्नशीलता, लज्जा व सौदर्यौपासना है। इस नक्षत्र में जन्मे व्यक्ति की आँखों एवं वचनों में विशेष आकर्षण होता है। ये लोग कुशल व्यवसायी साबित होते हैं और दूसरों का मन पढ़कर उनसे अपना काम निकलवा सकते हैं। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले लोगों को अपने भाइयों का पूरा सहयोग मिलता है।

आश्लेषा नक्षत्र का प्रथम चरण- लग्न या चंद्रमा, आश्लेषा नक्षत्र के प्रथम चरण में आता हो तो ऐसा जातक बड़े शरीर वाला, स्वच्छ आंखों से युक्त होता है। नज़रों में जादू व आकर्षण होता है। यह गौर वर्ण का होता है। सुंदर नाक एवं बड़े दांत होते हैं। बोलने में कुशल होता है। धनी एवं वाहनों से लाभ पाने वाला हो सकता है।

आश्लेषा नक्षत्र का दूसरा चरण- लग्न या चंद्रमा आश्लेषा नक्षत्र के दूसरे चरण में आता हो तो गोल मटोल होत है, बाल बिखरे से और कम रोम वाला होता है, दूसरों के घर रहने वाला हो सकता है, कौए के समक्ष आकृति हो सकती है. जातक पर रोग का प्रभाव भी जल्द हो सकता है।

आश्लेषा नक्षत्र का तीसरा चरण- लग्न या चंद्रमा आश्लेषा नक्षत्र के तीसरे चरण में जातक का सिर उभार वाला हो सकता है, योग्य रुप से काम न कर पाए. आकर्षक मुख एवं भुजाओं वाला होता है. धीमा चलने वाला होता है. त्वचा से संबंधी विकार परेशान कर सकते हैं , नाक थोड़ी चपटी हो सकती है.

आश्लेषा नक्षत्र का चौथा चरण (ashlesha nakshatra charan 4) आश्लेषा नक्षत्र 4 चरण लग्न या चंद्रमा, आश्लेषा नक्षत्र के चौथे चरण में आता हो तो जातक गौरे रंग का एवं मछली के समान आंखों वाला होता है. शरीर में चर्बी अधिक हो सकती है। कोमल पैर ओर भारी जांघे हो सकती हैं, टखने और घुटने पतले होते हैं।

गंड मूल नक्षत्र आश्लेषा- आश्लेषा नक्षत्र के बारे में कहा जाता है कि अगर जातक का पहले पद में जन्म हुआ है तो माता को त्याग देता है, दूसरे पाये में पिता को त्याग देता है, तीसरे पाये में अपने बड़े भाई या बहन को और चौथे पाये में अपने को ही सात दिन, सात महीने, सात वर्ष के अन्दर सभी प्रभावों को दिखा देता है।

आश्लेषा नक्षत्र नाम अक्षरडी,डू,डे,डो

10 मघा नक्षत्र: मघा नक्षत्र के चार चरण

मघा नक्षत्र गण्डमूल नक्षत्र है। सूर्य इसका स्वामी है जिसकारण जातक बहुत प्रभावी बन जाते हैं। इनके भीतर ईश्वरीय आस्था बह होती है। इनके भीतर स्वाभिमान की भावना प्रबल होती है और बहुत ही जल्दी इनका दबदबा भी कायम हो जाता है। ये कर्मठ होते हैं और किसी भी काम को जल्दी से जल्दी पूरा करने की कोशिश करते हैं। आँखें विशेष चमक लिए हुए, चेहरा शेर के समान भरा हुआ एवं रौबीला होता है।

मघा नक्षत्र का प्रथम चरण
लग्न या चंद्रमा, मघा नक्षत्र के प्रथम चरण में आता हो तो ऐसा जातक अधिक क्रोधी स्वभाव का होता है। पतला पेट और नाक का अग्र भाग लालिमा युक्त होता है। बड़ा सिर व ऊंची मांसल छाती वाला। जातक बहादुर होता है।

मघा नक्षत्र का दूसरा चरण
लग्न या चंद्रमा, मघा नक्षत्र के दूसरे चरण में आता हो तो जातक का विशाल व ऊंचा मस्तक होता है. तिरछे नैन नक्श, लम्बी भुजाएं होती हैं। उभरी हुई छाती और मोटी फैली हुई सी नाक होती है।

मघा नक्षत्र का तीसरा चरण Nakshatron ke charan
लग्न या चंद्रमा, मघा नक्षत्र के तीसरे चरण में आता हो तो जातक भारी चौड़ी छाती वाला होता है, छाती पर अधिक बाल होते हैं, लाल आंखें, त्याग करने वाला होता है।

मघा नक्षत्र का चौतुर्थ चरण Nakshatron ke charan
लग्न या चंद्रमा, मघा नक्षत्र के चौथे चरण में आता हो तो जातक कोमल शरीर और त्वचा में चमक लिए होता है। आंखें बडी़ व पुतली काली होती है। कोमल केश वाला भारी हाथ पैर से युक्त तथा आवाज़ में थोड़ा रुखापन हो सकता है। इसका पेट कुछ मोटा होता है।

मघा नक्षत्र नाम अक्षरमा,मी,मू,मे

11 पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में जन्म लेने वाला जातक nakshatron ke charan

पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में हुआ है तो आप ऐसे भाग्यशाली व्यक्ति हैं जो समाज में सम्माननीय हैं और जिनका अनुसरण हर कोई करना चाहता है। परिवार में भी आप एक मुखिया की भूमिका में रहते हैं। जातक को संगीत और कला की विशेष समझ होती है जो बचपन से ही दिखाई देने लगती है। ये लोग नैतिकता और ईमानदारी के रास्ते पर चलकर ही अपना जीवन व्यतीत करते हैं। शांति पसंद होने की वजह से किसी भी तरह के विवाद या लड़ाई-झगड़े में पड़ना पसंद नहीं करते। इनके पास धन की मात्रा अच्छी खासी होती है जिसकी वजह से ये भौतिक सुखों का आनंद उठाते हैं। ये लोग अहंकारी प्रवृत्ति के होते हैं। पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र नाम अक्षरमो,टा,टी,टू

12 उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र Nakshatron ke charan

इस नक्षत्र में जन्मा जातक दूसरों के इशारों पर चलना पसंद नहीं करते और अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए भरपूर प्रयास करते हैं। इस नक्षत्र में जन्में लोग समझदार,बुद्धिमान, युद्ध विद्या में निपुण, लड़ाकू एवं साहसी होता है। आप देश और समाज में अपने रौबीले व्यक्तित्व के कारण पहचाने जाते हैं। ये दूसरों का अनुसरण नहीं करते अपितु लोग उनका अनुसरण करते हैं। नेतृत्व के गुण जन्म से ही होते हैं अतः आप अपना कार्य करने में खुद ही सक्षम होते हैं। सरकारी क्षेत्र में इनको सफ़लत मिलती है। एक काम को करने में काफी समय लगा देते हैं।

उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र के चरण अक्षर- टे,टो,पा,पी

13 हस्त नक्षत्र Nakshatron ke charan

यदि आपका जन्म हस्त नक्षत्र में हुआ है तो आप संसार को जीतने और उसपर शासन करने का पूरा पूरा सामर्थ्य एवं शक्ति रखते है। ये लोग बौद्धिक, मददगार, निर्णय लेने में अक्षम, कुशल व्यवसायिक गुणों वाले और दूसरों से अपना काम निकालने में माहिर माने जाते हैं। इन्हें हर प्रकार की सुख-सुविधाएं मिलती हैं और इनका जीवन आनंद में बीतता है। दृढ़ता और विचारों की स्थिरता इनको आम आदमी से भिन्नता और श्रेष्ठता प्रदान करती है।

हस्त नक्षत्र 4 charan -:

हस्त नक्षत्र का प्रथम चरण- इस नक्षत्र के प्रथम चरण का मालिक मंगल देव है। हस्त नक्षत्र में पैदा हुआ जातक बलवान, साहसी, शूरवीर और ज्ञानी होता है। वह हर बात को तर्क के आधार पर अपनाता है और विचार-विमर्श करता है। ऐसा देखा गया है कि जब बुध की दशा होती है तो जातक को लाभ मिलता है और शुक्र की दशा में इसका भाग्योदय होता है। हस्त नक्षत्र के जातक को चंद्रमा भी उत्तम फल प्रदान करता है। जातक चंचल स्वभाव का भी हो सकता है।
हस्त नक्षत्र का दूसरा चरण- ऐसा देखा गया है कि इस चरण में पैदा हुआ जातक बीमारियों से घिरा रहता है। हस्त नक्षत्र का स्वामी शुक्र है। ऐसा देखा गया है कि जातक को कई प्रकार की बीमारियां जैसे एलर्जी, चर्म रोग आदि होते हैं। बुध की दशा में कुछ राहत व लाभ मिलता है। शुक्र की दशा में भी भाग्योदय होता है जबकि चंद्रमा की दशा सामान्य ही रहती है।
हस्त नक्षत्र का तीसरा चरण- हस्त नक्षत्र का तीसरा चरण- जातक धनवान व समृद्ध होता है। इस चरण का स्वामी बुध होता है। लग्नेश बुध की दशा उत्तम मानी जाती है। शुक्र की दशा में भाग्य उदय होगा व चंद्रमा की दशा मिश्रित फल प्रदान करती है।
हस्त नक्षत्र का चौथा चरण- चौथे चरण में पैदा हुआ जातक धनवान होता है। लग्नेश बुध व शुक्र की दशा में भाग्योदय होता है। चंद्रमा जातक को मिश्रित फल देगा तथा सामान्य स्थिति रहेगी। इस चरण का स्वामी चंद्र देव होते हैं।

हस्त नक्षत्र के नाम अक्षर- पू,ष,ण,ठ

14 चित्रा नक्षत्र

जातक के स्वभाव में आपको मंगल ग्रह का प्रभाव दिखाई दे सकता है। ये लोग आकर्षक व्यक्तित्व वाले एवं शारीरिक रूप से संतुलित मनमोहक एवं सुन्दर आँखों वाले, साज-सज्जा का शौक रखने वाले और नित नए आभूषण एवं वस्त्र खरीदने वाले होते हैं। हर किसी के साथ अच्छे संबंध बनाए रखने की कोशिश करते हैं, इन्हें आप सामाजिक हितों के लिए कार्य करते हुए भी देख सकते हैं। ये लोग विपरीत हालातों से बिल्कुल नहीं घबराते और खुलकर मुसीबतों का सामना करते हैं।

इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक मोती के समान चमकते हैं अर्थात इनका स्वभाव और आचरण स्वच्छ होता है। ये लोग सात्विक और तामसिक दोनों ही प्रवृत्ति वाले होते हैं। एक आकर्षक चेहरे और आकर्षक व्यक्तित्व के स्वामी होते हैं। आपका शरीर भीड़ से अलग सुडौल एवं भरा हुआ होता है। आप जैसा सोचते हैं वैसा करते हैं और दिखावा पसंद नहीं करते है। आप एक स्वतंत्र आत्मा के स्वामी है जिसको किसी के भी आदेश का पालन करना कतई पसंद नहीं। ये लोग राजनीतिक दांव-पेंचों को अच्छी तरह समझते हैं और अपने प्रतिद्वंदियों पर हमेशा जीत हासिल करते हैं। चित्रा नक्षत्र नाम अक्षरपे,पो,रा,री

15 स्वाति नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक

इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक मोती के समान चमकते हैं अर्थात इनका स्वभाव और आचरण स्वच्छ होता है। ये लोग सात्विक और तामसिक दोनों ही प्रवृत्ति वाले होते हैं। एक आकर्षक चेहरे और आकर्षक व्यक्तित्व के स्वामी होते हैं। आपका शरीर भीड़ से अलग सुडौल एवं भरा हुआ होता है। आप जैसा सोचते हैं वैसा करते हैं और दिखावा पसंद नहीं करते है। आप एक स्वतंत्र आत्मा के स्वामी है जिसको किसी के भी आदेश का पालन करना कतई पसंद नहीं। ये लोग राजनीतिक दांव-पेंचों को अच्छी तरह समझते हैं और अपने प्रतिद्वंदियों पर हमेशा जीत हासिल करते हैं। स्वाति नक्षत्र नाम अक्षररू,रे,रो,ता

16 विशाखा नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक Nakshatron ke charan

यदि आपका जन्म विशाखा नक्षत्र में हुआ है तो आप शारीरिक श्रम के स्थान पर मानसिक कार्यों को अधिक मानते हैं। शारीरिक श्रम करने से आपका भाग्योदय नहीं होता। मानसिक रूप से आप सक्षम व्यक्ति है और कठिन से कठिन कार्य को भी अपनी सूझ-बूझ कर लेते हैं। पठन-पाठन के कार्यों में उत्तम साबित होते हैं ये लोग। ये लोग शारीरिक श्रम तो नहीं कर पाते लेकिन अपनी बुद्धि के प्रयोग से सभी को पराजित करते हैं। स्वभाव से ईर्ष्यालु परन्तु बोल चाल से अपना काम निकलने का गुण इनमे स्वाभाविक होता है। सामाजिक होने से इनका सामाजिक दायरा भी बहुत विस्तृत होता है। ये लोग महत्वाकांक्षी होते हैं और अपनी हर महत्वाकांक्षा को पूरा करने के लिए बहुत मेहनत करते हैं। विशाखा नक्षत्र नाम अक्षरती,तू,ते,तो

17 अनुराधा नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक (Nakshatron ke charan)

इस नक्षत्र में जन्में लोग अपने आदर्शों और सिद्धांतों पर जीते हैं। इनका अधिकाँश जीवन विदेशों में बीतता है और विदेशों में रहकर ये धन और समाज में मान सम्मान दोनों कमाते है। ये लोग अपने गुस्से को नियंत्रित नहीं कर पाते इस कारण इन्हें कई बार बड़े नुकसान उठाने पड़ते हैं। ये लोग अपने दिमाग से ज्यादा दिल से काम लेते हैं और अपनी भावनाओं को छिपाकर नहीं रख पाते। ये लोग जुबान से थोड़े कड़वे होते हैं जिसकी वजह से लोग इन्हें ज्यादा पसंद नहीं करते। आप बहुत साहसी एवं कर्मठ व्यक्तित्व के स्वामी हैं। अनुराधा नक्षत्र नाम अक्षर- ना,नी,नू,ने

18 ज्येष्ठ नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक

गण्डमूल नक्षत्र की श्रेणी में होने की वजह से यह भी अशुभ नक्षत्र ही माना जाता है। आप दृढ़ निश्चयी और मज़बूत व्यक्तित्व के स्वामी है। आप नियम से जीवन व्यतीत करना पसंद करते हैं। आप शारीरिक रूप से गठीले और मज़बूत होते हैं तथा कार्य करने में सैनिकों के समान फुर्तीले होते हैं। आपकी दिनचर्या सैनिकों की तरह अनुशासित और सुव्यवस्थित होती है। खुली मानसिकता वाले ये लोग सीमाओं में बंधकर अपना जीवन नहीं जी पाते। ये लोग तुनक मिजाजी होते है और छोटी-छोटी बातों पर लड़ने के लिए तैयार हो जाते हैं।

ज्येष्ठा नक्षत्र नाम अक्षर- नो,या,यी,यू

  1. मूल नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक
    यदि आपका जन्म मूल नक्षत्र में हुआ है तो आपका जीवन सुख समृद्धि के साथ बीतेगा। धन की कमी न होने के कारण ऐश्वर्य पूर्ण जीवन जीते है। आप अपने कार्यों द्वारा अपने परिवार का नाम और सम्मान और बढ़ाएंगे। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्तियों के परिवार को इनके दोष का भी सामना करना पड़ता है लेकिन इनकी कई विशेषताएं हैं जैसे कि इनका बुद्धिमान होना, इनकी वफादारी, सामाजिक रूप से जिम्मेदार आदि। इन्हें आप विद्वानों की श्रेणी में रख सकते हैं। ये कोमल हृदयी परन्तु अस्थिर दिमाग के व्यक्ति होते है। कभी आप बहुत दयालु और कभी अत्यधिक नुकसान पहुंचाने वाले होते है। मूल नक्षत्र नाम अक्षर- ये,यो,भा,भी

20 पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक- Nakshatron ke charan

पूर्वाषाढा में जन्म लेने वाला जातक थोडा नकचढ़ा और उग्र स्वभाव के होने बावजूद कोमल हृदयी और दूसरों से स्नेह रखने वाला होता है। ये लोग ईमानदार, प्रसन्न, खुशमिजाज, कला, सहित्य और अभिनय प्रेमी, बेहतरीन दोस्त और आदर्श जीवनसाथी होते हैं। जीवन में सकारत्मक विचारधारा से अपने लक्ष्य को प्राप्त करते हैं। आपका व्यक्तित्व दूसरों पर हावी रहता है परन्तु आप एक संवेदनशील व्यक्ति हैं जो दूसरों की मदद के लिए सदैव तैयार रहते है। इन्हे अधिक प्रेम व सम्मान मिलता है परन्तु अपनी चंचल बुद्धि के कारण आप अधिक वफादार नहीं होते हैं और कभी-कभी अनैतिक कार्यों में भी लिप्त हो जाते हैं।

पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र नाम अक्षर- भू,ध,फ, ढ़

21 उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक, Nakshatron ke charan

उत्तराषाढा में जन्मा जातक ऊँचे कद, गठीले शारीर ,चमकदार आँखे ,चौड़ा माथा और गौर वर्ण के साथ लालिमा लिए हुए होते हैं। सफल एवं स्वतंत्र व्यक्ति, मृदुभाषी और सभी से प्रेम पूर्वक व्यवहार आपमें स्वाभाविक हैं। ईश्वर में आस्था, जीवन में प्रसन्नता और मैत्री, आगे बढ़ने में विश्वास आदि आपकी खासियत है। विवाह उपरान्त जीवन में अधिक सफलता एवं प्रसन्नता होती है। ये लोग आशावादी और खुशमिजाज स्वभाव के होते हैं। नौकरी और व्यवसाय दोनों ही में सफलता प्राप्त करते हैं। ये लोग काफी धनी भी होते हैं।

उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के अक्षर- भे,भो,जा,जी

22 श्रवण नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक

ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, माता-पिता के लिए अपना सर्वस्व त्यागने वाले श्रवण कुमार के नाम पर ही इस नक्षत्र का नाम पड़ा है। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले लोगों में कई विशेषताएं होती हैं जैसे कि इनका ईमानदार होना, इनकी समझदारी, कर्तव्यपरायणता,एक स्थिर सोच, निश्छलता और पवित्र व्यक्ति होते है। ये लोग माध्यम कद काठी परन्तु प्रभावी और आकर्षक व्यक्तित्व के स्वामी है। आजीवन ज्ञान प्राप्त करने की लालसा और समाज के बुद्धिजीवियों में आप की गिनती होती है। ये लोग जिस भी कार्य में हाथ डालते हैं उसमें सफलता हासिल करते हैं। ये लोग कभी अनावश्यक खर्च नहीं करते, जिसकी वजह से लोग इन्हें कंजूस भी समझ बैठते हैं। आप दूसरों के प्रति बहुत अधिक स्नेह की भावना रखते हैं इसलिए औरों से भी उतना ही स्नेह व सम्मान प्राप्त करते हैं

श्रवण नक्षत्र नाम अक्षर- खी,खू,खे,खो

23 धनिष्ठा नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक, Nakshatron ke charan

धनिष्ठा नक्षत्र में जन्मा जातक सभी गुणों से समृद्ध होकर जीवन में सम्मान और प्रतिष्ठा पाता है। ये लोग काफी उर्जावान होते हैं और उन्हें खाली बैठना बिल्कुल पसंद नहीं होता। ये स्वभाव से बहुत ही नरम दिल एवं संवेदनशील व्यक्ति होते हैं। दान और आध्यत्म होते हैं। आपका रवैया अपने प्रियजनों के प्रति बेहद सुरक्षात्मक होता है किन्तु फिर भी आप दूसरों के लिए जिद्दी और गुस्सैल ही रहते हैं। ये लोग अपनी मेहनत और लगन के बल पर अपनी मंजिल हासिल कर ही लेते हैं। इन्हें दूसरों को अपने नियंत्रण में रखना अच्छा लगता है और ये अधिकार भावना भी रखते हैं। इन्हें शांतिपूर्ण तरीके से अपना जीवन जीना पसंद है।

धनिष्ठा नक्षत्र नाम अक्षरगा,गी,गू,गे

24 शतभिषा नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक Nakshatron ke charan

शतभिषा नक्षत्र में जन्मा जातक बहुत साहसी एवं मजबूत विचारों वाला होता है। शारीरिक श्रम न करके हर समय अपनी बुद्धि का परिचय देते हैं। इस नक्षत्र में जन्में लोग स्वच्छंद विचारधारा के होते है अत: साझेदारी की अपेक्षा स्वतंत्र रूप से कार्य करना पसंद करते हैं। ये लोग अत्यधिक सामर्थ्य, स्थिर बुद्धि और उन्मुक्त विचारधारा के होते हैं और मशीनी तौर पर जीना इन्हें कतई बरदाश्त नहीं होता। ये अपने शत्रुओं पर हमेशा हावी रहते हैं। समृद्धशाली होने के कारण अपने आस-पास के लोगों से सम्मान प्राप्त होता है।

शतभिषा नक्षत्र नाम अक्षरगो,सा,सी,सू

शतभिषा नक्षत्र 4 चरण- Nakshatron ke charan
प्रथम चरण : इस चरण का स्वामी बृहस्पति हैं। शतभिषा नक्षत्र के प्रथम चरण में जन्मा जातक कुशल वक्ता होता है, शतभिषा नक्षत्र के प्रथम चरण का स्वामी बृहस्पति शनि का शत्रु है और राहु का भी । अतः बृहस्पति की दशा अपेक्षित फल नहीं देगी। बृहस्पति में राहु व् शनि का अंतर कष्टदायी होगा। राहु की दशा उत्तम फल देगी।

शतभिषा नक्षत्र द्वितीय चरण Nakshatron ke charan : इस चरण का स्वामी शनि हैं।शतभिषा नक्षत्र के दूसरे चरण में जन्मा जातक अपने समाज के अग्रगण्य धनवानों में गिने जाते हैं। शतभिषा नक्षत्र के दूसरे चरण का स्वामी शनि लग्नेश भी है अतः शनि की दशा शुभ फल देगी। राहु की स्वतंत्र दशा उत्तम फल देगी, परन्तु राहु में शनि या शनि में राहु की अन्तर्दशा शत्रु तुल्य कष्ट देगी।

शतभिषा नक्षत्र तृतीय चरण Nakshatron ke charan : इस चरण का स्वामी शनि हैं।शतभिषा नक्षत्र के तीसरे चरण में जन्मा जातक अपने समाज में सुखी एवं संपन्न व्यक्ति होता है। शतभिषा नक्षत्र के तीसरे चरण का स्वामी शनि लग्नेश भी है अतः शनि की दशा शुभ फल देगी। राहु की स्वतंत्र दशा उत्तम फल देगी, परन्तु राहु में शनि या शनि में राहु की अन्तर्दशा शत्रु तुल्य कष्ट देगी।

शतभिषा नक्षत्र चतुर्थ चरण, Nakshatron ke charan: इस चरण का स्वामी बृहस्पति हैं. शतभिषा नक्षत्र के चौथे चरण में जन्मे जातक का पुत्र योग प्रबल होता है । शतभिषा नक्षत्र के चौथे चरण का स्वामी बृहस्पति शनि का शत्रु है और राहु का भी. अतः बृहस्पति की दशा अपेक्षित फल नहीं देगी। लग्नेश शनि की दशा अन्तर्दशा जातक को उत्तम स्वस्थ्य व् उन्नत्ति देगी।

25 पूर्वाभाद्रपद में जन्म लेने वाले जातक

गुरु ग्रह के स्वामित्व वाले इस नक्षत्र में जन्में जातक सत्य और नैतिक नियमों का पालन करने वाले होते हैं। साहसी, दूसरों की मदद करने वाले, मिलनसार, मानवता में विश्वास रखने वाले, व्यवहार कुशल, दयालु और नेक दिल होने के साथ-साथ खुले विचारों वाले होते हैं। ये लोग आध्यात्मिक प्रवृत्ति के साथ-साथ ज्योतिष के भी अच्छे जानकार कहे जाते हैं। ये लोग अपने आदर्शो और सिद्धांतों पर ही आजीवन चलना पसंद करते हैं।

पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र नाम अक्षरसे,सो,दा,दी

26 उत्तराभाद्रपद में जन्म लेने वाले जातक

इस नक्षत्र में जन्में लोग हवाई किलों या कल्पना की दुनिया में विश्वास नहीं करते। ये लोग बेहद यथार्थवादी और हकीकत को समझने वाले होते हैं। व्यापार हो या नौकरी, इनका परिश्रम इन्हें हर जगह सफलता दिलवाता है। त्याग भावना, स्वभाव से एक दयालु धार्मिक होने के साथ-साथ वैरागी भी होते हैं। समाज में एक धार्मिक नेता, प्रसिद्द शास्त्र विद एवं मानव प्रेमी के रूप में प्रख्यात होते है। कोमल हृदयी हैं एवं दूसरों के साथ सदैव सद्भावना के साथ-साथ दुर्व्यवहार करने वाले को क्षमा और दिल में किसी के प्रति कोई द्वेष नहीं रखते।

उत्तराभाद्रपद नक्षत्र नाम अक्षरदू,थ,झ,ण

  1. रेवती नक्षत्र में जन्मे जातक का व्यक्तित्व- रेवती नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक रेवती नक्षत्र में जन्मे जातक निश्चल प्रकृति के होते हैं। वो साहसिक कार्य और पुरुषार्थ प्रदर्शन की आपको ललक सदा ही रहती है। वो माध्यम कद,गौर वर्ण के होते है। इनके व्यक्तित्व में संरक्षण, पोषण और प्रदर्शन प्रमुख है। परंपराओं और मान्यताओं को लेकर ये लोग काफी रूढ़िवादी होने के बावजूद अपने व्यवहार में लचीलापन रखते हैं। इनकी शिक्षा का स्तर काफी ऊंचा होता है और अपनी सूझबूझ से ये बहुत सी मुश्किलों को हल कर लेते हैं। रेवती नक्षत्र नाम अक्षरदे,दो,चा,ची

‘मलमास’ या ‘अधिमास Know About Nakshtras

चंद्रमास : चंद्रमा की कला की घट-बढ़ वाले दो पक्षों (कृष्‍ण और शुक्ल) का जो एक मास होता है वही चंद्रमास कहलाता है। चंद्रमास तिथि की घट-बढ़ के अनुसार 29, 30, 28 एवं 27 दिनों का भी होता है। कुल मिलाकर यह चंद्रमास 355 दिनों का होता है। सौर-वर्ष से 11 दिन 3 घटी 48 पल छोटा है चंद्र-वर्ष इसीलिए हर 3 वर्ष में इसमें 1 महीना जोड़ दिया जाता है। सौरमास 365 दिन का होता है। सौर्य और चंद्र मास में 10 दिन का अंतर आता है। इन दस दिनों को चंद्रमास ही माना जाता है। फिर भी ऐसे बड़े हुए दिनों को ‘मलमास’ या ‘अधिमास’ कहते हैं।

चंद्रमास के नाम:- चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ, अषाढ़, श्रावण, भाद्रपद, अश्विन, कार्तिक, अगहन, पौष, माघ और फाल्गुन।

Nakshatron ke charan चंद्र महीनों के नाम पूर्णिमा के दिन चंद्रमा जिस नक्षत्र में रहता है:-

1.चैत्र : चित्रा, स्वाति।
2.वैशाख : विशाखा, अनुराधा।
3.ज्येष्ठ : ज्येष्ठा, मूल।
4.आषाढ़ : पूर्वाषाढ़, उत्तराषाढ़, सतभिषा।
5.श्रावण : श्रवण, धनिष्ठा।
6.भाद्रपद : पूर्वभाद्र, उत्तरभाद्र।
7.आश्विन : अश्विन, रेवती, भरणी।
8.कार्तिक : कृतिका, रोहणी।
9.मार्गशीर्ष : मृगशिरा, उत्तरा।
10.पौष : पुनर्वसु, पुष्य।
11.माघ : मघा, अश्लेशा।12.फाल्गुन : पूर्वाफाल्गुन, उत्तराफाल्गुन, हस्त।

नक्षत्र मास क्या है?, Nakshatron ke charan

आकाश में स्थित तारा-समूह को नक्षत्र कहते हैं। साधारणत: ये चन्द्रमा के पथ से जुडे हैं। नक्षत्र से ज्योतिषीय गणना करना वेदांग ज्योतिष का अंग है। नक्षत्र हमारे आकाश मंडल के मील के पत्थरों की तरह हैं जिससे आकाश की व्यापकता का पता चलता है। वैसे नक्षत्र तो 88 हैं किंतु चन्द्रपथ पर 27 ही माने गए हैं। जिस तरह सूर्य मेष से लेकर मीन तक भ्रमण करता है, उसी तरह चन्द्रमा अश्‍विनी से लेकर रेवती तक के नक्षत्र में विचरण करता है तथा वह काल नक्षत्र मास कहलाता है। यह लगभग 27 दिनों का होता है इसीलिए 27 दिनों का एक नक्षत्र मास कहलाता है।

नक्षत्रों के गृह स्वामी :
केतु:- आश्विन, मघा, मूल।
शुक्र:- भरणी, पूर्वा फाल्गुनी, पूर्वाषाढ़ा।
रवि:- कार्तिक, उत्तरा फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा।
चन्द्र:- रोहिणी, हस्त, श्रवण।
मंगल:- मृगशिरा, चित्रा, धनिष्ठा।
राहु:- आर्द्रा, स्वाति, शतभिषा।
बृहस्पति:- पुनर्वसु, विशाखा, पूर्वा भाद्रपद।
शनि:- पुष्य, अनुराधा, उत्तरा भाद्रपद।
बुध:- आश्लेषा, ज्येष्ठा, रेवती।

Call or whatsapp us: +91-98726-65620
E-Mail us: info@bhrigupandit.com
Website: https://www.bhrigupandit.com
FB: https://www.facebook.com/astrologer.bhrigu/
Pinterest: https://in.pinterest.com/bhrigupandit588/
Twitter: https://twitter.com/bhrigupandit588

tags- नक्षत्र के चरण, nakshatra charan, नक्षत्र चरण,nakshatra ke charan, नक्षत्र चरणाक्षर, नक्षत्र चरण अक्षर, उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के अक्षर, अश्विनी नक्षत्र चतुर्थ चरण, nakshatra charan in hindi, हस्त नक्षत्र चतुर्थ चरण, उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र चरण, रेवती नक्षत्र तृतीय चरण, चित्रा नक्षत्र तृतीय चरण, अश्विनी नक्षत्र के चरण, nakshatra in hindi, नक्षत्र, नक्षत्र चरण स्वामी, charan nakshatra, nakshatra akshar, आश्लेषा नक्षत्र 4 चरण, nakshatra charan akshar, mool nakshatra charan in hindi, नछत्र चरण, नक्षत्र अक्षर, शतभिषा नक्षत्र के चरण अक्षर, marjar yoni, नक्षत्रों के नाम, मूल नक्षत्र के चरण, nakshatra jyotish, अश्विनी नक्षत्र के अक्षर, नक्षत्रों के चरण, पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र के अक्षर, उत्तराभाद्रपद नक्षत्र तृतीय चरण, नक्षत्र ज्योतिष, uttarashada nakshatra in hindi, नक्षत्र फलादेश Nakshatron ke charan,
27 nakshatra in hindi, नक्षत्र के अनुसार नाम का पहला अक्षर, नक्षत्र ज्योतिष के पी, मूल नक्षत्र के चारों चरण, नक्षत्र के अनुसार नाम, dhanishta, nakshatra in hindi, नक्षत्र और उनके चरण, मृगशिरा नक्षत्र तृतीय चरण, ज्येष्ठा नक्षत्र नाम अक्षर, अश्विनी नक्षत्र तृतीय चरण, चू चे चो ला अश्विनी, पुनर्वसु नक्षत्र ke akshar, अश्विनी नक्षत्र के प्रथम चरण, कृतिका नक्षत्र के अक्षर, श्रवण नक्षत्र नाम अक्षर, हस्त नक्षत्र तृतीय चरण, अश्विनी नक्षत्र के नाम, आद्रा नक्षत्र चतुर्थ चरण, उत्तराषाढ़ा नक्षत्र प्रथम चरण, उत्तराभाद्रपद प्रथम चरण, विशाखा नक्षत्र चतुर्थ चरण, पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र चरण, मृगशिरा नक्षत्र प्रथम चरण, रेवती नक्षत्र चतुर्थ चरण, शतभिषा नक्षत्र 4 चरण, मार्जार योनि, अनुराधा नक्षत्र चतुर्थ चरण, मूल नक्षत्र चतुर्थ चरण, विशाखा नक्षत्र चरण, धनिष्ठा नक्षत्र 4 चरण, purvashada nakshatra in hindi, nakshatra ke naam, नक्षत्र लिस्ट, nakul yoni, ashwini nakshatra in hindi, purvashada nakshatra hindi, नक्षत्र के नाम, अश्विनी नक्षत्र, manushya gan and rakshas gan marriage in hindi

8 thought on नक्षत्रों के चरण तथा इनके चरणाक्षर

  1. He has Amazing Astro Predictions, I am his regular client, he will give you best service. He did best remedies for me. I am at the top level now.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow my blog with Bloglovin
Open chat
1
hello, how can i help you ?