what is Vashikaran Buti | वशीकरण बूटी से वशीकरण करें -Vashikaran

what is Vashikaran Buti | वशीकरण बूटी से वशीकरण करें -Vashikaran

वशीकरण बूटी से वशीकरण करें
जिस प्रकार से आप इत्र या सेंट को लगाकर महक उठते हैं और कोई भी आपकी तरफ आकर्षित हो जाता है उसी प्रकार ऐसी कई चमत्कारिक बूटियां vashikaran paudha हैं जिनसे तुरंत वशीकरण हो जाता है। इन बूटियों का प्रयोग विभिन्न प्रकार के लाभ प्राप्त करने के लिए प्राचीन काल से किया जा रहा है। जिस प्रकार कई बूटियों से पौरुष, ताकत, संतान की प्राप्ति होती है उसी प्रकार इन बूटियों से सम्मोहन अथवा वशीकरण भी किया जाता है। what is Vashikaran Buti | वशीकरण बूटी से वशीकरण करें -Vashikaran

रामायण काल में संजीवनी बूटी की मदद से जीवन प्रदान किया जा सकता था। इस बूटी में इतनी ताकत होती थी कि यह किसी भी घाव को तुरंत भर देती थी। इस प्रकार कई चमत्कारिक बूटियां से जिनसे कई प्रकार के रोगों से छुटकारा व लाभ प्राप्त किया जा सकता है। ह्म आपको वशीकरण बूटियों के चमस्तकारिक गुणों को बताएंगे। what is Vashikaran Buti | वशीकरण बूटी से वशीकरण करें -Vashikaran

किसी भी परीक्षा में या इनटरव्यू में पास होने या प्रसिद्धि प्राप्त करने के लिए बूटियां
आम का बांदा, खैर का बांदा, बरगद का बांदा व पीपल आदि का बांदा:– इस पेड़ों के बांदे को भुजा पर धारण करने से कभी भी आपकी हार नहीं होती और विजय प्राप्त होती है। खैर का बांदा घर में रखने से रोग नहीं आते व बरगद का बांदा रखने से वंश बढ़ता है और प्रसिद्धि प्राप्त होती है। पीपल का बांदा घर में रखने से हर काम में सफलता प्राप्त होती है। mohini Vashikaran mantra
बांदा क्या होता है- बांदा पेड़ों में लगा वह अन्य परजीवी पौधा होता है जो उस पेड़ के साथ ही उग आते हैं। जैसे पीपल आदि के पेड़ के साथ कोई लता या अन्य पेड़ उग जाता है तो उसे उस पेड़ का बांदा कहते हैं।  what is vashikaran buti
बांदा को पेड़ से कैसे प्राप्त करें- वैसे तो आप किसी प्राचीन पंसारी की दुकान से हर प्रकार का बांदा प्राप्त कर सकते हैं या उससे मंगवा सकते हैं लेकिन यदि आपने स्वयं बांदा लाना है तो पहले आप उस पेड़ को खोजना होगा जिसमें एक ही जड़ से 2 पौधे निकले हैं। आप उस पेड़ के पास एक दिन पहले जाएं और उससे बांदा देने का आग्रह करें। इसके बाद अगले दिन सूर्य ढलने से कुछ समय पूर्व या रात्रि को जाकर आक बांदे को निकाल कर घर ले आएं।

                                                                                 hattha jodi se Vashikaran
  • हत्था जोड़ी सेVashikaran व्यापार में लाभ, पैसा, प्रसिद्धि पाएं- हत्था जोड़ी एक बहुत ही दुर्लभ बूटी होती है और यह बाजार में नहीं मिलती। इसे विशेष लोग ही खोज सकते हैं। इस बूटी vashikaran paudha से Vashikaran धन, सम्पदा, लाभ, नौकरी, वशीकरण का काम लिया है। हत्था जोड़ी को अपने पास रखने से लोग आपको सम्मान देने लगते हैं। इसे तिजौरी में रखने से धन लाभ, घर में रखने सो कोर्ट कचहरी में जीत व लोगों में सम्मान मिलता है। इसे दैवीय शक्ति का प्रतीक माना जाता है।  Read More- Vashikaran mantra for love
    क्या होती है हत्था जोड़ी- एक एक दुर्लभ बूटी होती है जो आम बाजार में नहीं मिलती।
  • इसे खोजने वाले मध्यप्रदेश के एक विशेष आदिवासी लोग होते हैं जिनको इसकी पूरी पहचान होती है। यह एक जड़ होती है जो जुड़ी होती है और उसे ऊपर 2 सींघ जैसे होते हैं। इसके पौधे को पहचान कर इसे भूमि से खोदकर निकाला जाता है। what is vashikaran buti
    उटकटारी का पौधा फोटो
    उटकटारी का पौधा फोटो
  • *उटकटारी:- यदि आप राजनीति के क्षेत्र में तरक्की करना चाहते हैं तो उटकटारी राजयोग दाता है। यह पौधा घर में रखने से इसके प्रभाव तुरंत मिलते हैं। यह राजनीतिक शक्ति का प्रतीक है। उटकटारी भाग्य में वृद्धि करता है। उटकटारी के पौधे को शुभ नक्षत्र व मुहूर्त में घर में लाकर पूजा करनी चाहिए।
  • क्या होता है उटकरारी- उटकटारी को काटेचुबुक; हिं. गोक्रू, उटकांटा; क. नीरगोळ गोळिके; गु. शुलिओ, उटकांटो; सं. उत्कंटक, कंटफल; लॅ. एकिनॉप्स एकिनॅटस; कुल-कंपॉझिटी आदि नामों से जाना जाता है। यह पौधा 30 से 90 सैंटीमीटर तक ऊंचा होता है। यह पौधा अफगाणिस्तानात व भारत लगभग सब जगह पर पाया जाता है।  Read More- Benefits of Utkantak
  • Hindi-ऊटकटेरा, उटकंटो, ऊँटकंटा 
  • Sanskrit-उत्कण्टक, उत्तुण्डक, कंटफल, रक्तफूला, कण्टालु , उटाटि
  • English- कैमेल्स् थिसिल (Camel’s thistle), Globe thistle (ग्लोब थिसिल) 
  • Urdu-ऊँटकटारा (Untkatara) 
  • Kannada-ब्रहमा डान्डे (Brahma dande) 
  • Gujarati-शुलियो (Shuliyo), उत्कन्टो (Utkanto), उत्काटो (Utkato)
  • Tamil-कट्टम (Kattam), कन्टाकम (Kantakam)
  • Telugu-ब्रह्मदण्डी (Brahmadandi)
  • Marathi-काडेचुबक (Kadechubak), उटांटी (Utanti) 
  • Arabic-अशोकुल जमाल (Ashokul jamal)
  • Persian-अष्टारखर (Ashtarkhar)
    rakat gunja
    rakat gunja photo  (source – google image)

रक्तगुंजा की जड़ या बीज:– रक्तगुंजा को इसे रत्ती भी कहते हैं। प्राचीन समय में इसे सोने आदि को तोलने के काम में लाया जाता था। इसका वजन एक रत्ती के बराबर होता है। इस पौधे की जड़ रवि पुष्य के दिन, किसी भी शुक्रवार को अथवा पूर्णिमा के दिन पूजा करर उखाड़ें औरइसे घर में गाय के दूध से धो कर रख दें। इसको अपने पास रखने से सारे कार्य सिद्ध होते हैं। मान-सम्मान में वृद्धि होती है।
क्या होते हैं रक्त गुंजा- श्वेत गुंजा व श्याम गुंजा के बीज- यह एक ऐसा पौधा होता है इससे नाल रंग के दाने निकलते हैं और एक दाने में काले रंग का धब्बा भी होता है। इसके रंग सफेद भी होता है और काला भी। लाल रंग के बीज माता लक्ष्मी के प्रतीक व काले रंग के माता काली का प्रतीक होते हैं।  Read More- Top Astrologer in USA

बांझपन व संतानोत्पत्ति के लिए चमत्कारिक जड़ी बूटियां-

  • निम्बू की जड़ का लाभ : आप निसंतान हैं और किसी दवाई का कोई असर नहीं हो रहा है तो आप उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र जब हो तो निम्बू के पेड़ की जड़ को निकाल लें। फिर इसकी जड़ लाकर उसे गाय के दूध में मिलाकर निःसंतान स्त्री को पिलाएं। इस प्रयोग से उसे पुत्र की प्राप्ति होगी।यग कारगर उपाय है।
  • काले एरंड की जड़ का चमत्कार : जब श्रवण नक्षत्र हो तो इस नक्षत्र में काले एरंड की जड़ लाकर निःसंतान स्त्री के गले में बांधें। इस प्रयोग से उसे संतान की प्राप्ति होगी। आपके पास यदि जंगल ऐरिया है तो वहां एरंडी का पेड़ जरूर लगा होगा। यह पेड़ पपीते के पेड़ तरह लगता है और इसके पत्ते भी पपीते के पेड़ की तरह ही होते हैं।
  • लटजीरा : लटजीरा के भी बहुत ही चमत्कारिक असर होते हैं। लटजीरा की जड़ को जलाकर भस्म बना लें। उसे दूध के साथ पीने से संतानोत्पति की क्षमता आ जाती हैं।
    क्या होती है लटजीरा- लटजीरा को अपामार्ग भी कहते है। यह एक एक औषधीय वनस्पति है। इसका वैज्ञानिक नाम ‘अचिरांथिस अस्पेरा’ (ACHYRANTHES ASPERA) है। हिन्दी में इसे ‘चिरचिटा’, ‘लटजीरा’, ‘चिरचिरा ‘ आदि नामों से जाना जाता है।इसे लहचिचरा भी कहा जाता है।
    लटजीरा अथवा अपामार्ग-
    *अपामार्ग एक सर्वविदित क्षुपजातीय औषधि है। वर्षा के साथ ही यह अंकुरित होती है, ऋतु के अंत तक बढ़ती है तथा शीत ऋतु में पुष्प फलों से शोभित होती है। ग्रीष्म ऋतु की गर्मी में परिपक्व होकर फलों के साथ ही क्षुप भी शुष्क हो जाता है। इसके पुष्प हरी गुलाबी आभा युक्त तथा बीज चावल सदृश होते हैं, जिन्हें ताण्डूल कहते हैं। शरद ऋतु के अंत में पंचांग (मूल, तना, पत्र, पुष्प, बीज) का संग्रह करके छाया में सुखाकर बन्द पात्रों में रखते हैं। बीज तथा मूल के पौधे के सूखने पर संग्रहीत करते हैं। इन्हें एक वर्ष तक प्रयुक्त किया जा सकता है। what is vashikaran buti
  • लक्ष्मणा बूटी का उपयोग : गांवों में इसे गूमा बूटी कहते कहते हैं। इसके उपयोग से संतान की प्राप्ति होती है। जिस महिला के संतान न हो रही हो तो वह सफेद लक्ष्मण बूटी की 21 गोली बना लें, इसे देसी गाय के दूध के साथ लगातार प्रात: एक गोली 21 दिन तक खाए। इसका असर तुरंत होता है और संतान हो जाती है। इसके इलावा विल्व पत्र, मदार की जड़ आदि के भी कई लाभ हैं। मदार की जड़ को कमर में बांधने से स्त्री को संतान सुख की प्राप्ति होती है। विल्व पत्रों को गाय के दूध में डालकर पीने से ताकत व संतान की प्राप्ति होती है।  READ More- What is Black Magic? How to Remove it.

वशीकरण बूटी से तांत्रिक प्रयोग-       

वशीकरण बूटी से तांत्रिक प्रयोग किए जाते हैं लेकिन इन प्रयोगों को करने की हर व्यक्ति को अनुमति नहीं है।वशीकरण बूटी का प्रयोग प्रशिक्षित तांत्रिक ही कर सकते हैं। इस लेप को उबटन की भांति शरीर पर लगाने से वशीकरण होने लगता है।

वशीकरण बूटियों से लेप – सफेद धुंधली की पत्तियों तथा ब्रह्मदंडी की जड़ों को निकाल कर सुखा लें और इसके बाद पीसकर लेप बनायें।
बताए गए मंत्र की एक माला जप करके इस लेप को शुद्ध और जागृत कर लेना चाहिए।

“अं आं इं उं उं ऋं ऋं फट स्वाहा।’’

वशीकरण गुटिका: तुलसी की पत्तियां छाया में सुखा लें। इसके बाद उन्हें भांग के बीज और असगंध मिला कर रखलें और गाय के दूध में पीस लें। अच्छी तरह से पिस जाने पर इसकी गोलियां बना लें। गोली बहुत छोटी-एक -एक रत्ती की होनी चाहिये। गोलियों पर उपरोक्त मंत्र की एकमाला फेरकर उन्हें सिद्ध कर लें और सेवन करें। नियमित रूप से प्रातःकाल एक गोली खाई जा सकती है। इस गोली के प्रयोग से वशीकरण का प्रभाव उत्पन्न होता है। 

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वशीकरण कारक टीका-
सिंदूर, सफेद दूब, नागरबेल का पत्ता मिलाकर पीसें। इस लेप को मंत्र द्वारा शुद्ध करके टीके की भांति लगाने से सम्मोहन प्रभाव उत्पन्न होता है।
हरताल और असगंध को केले के रस में पीस कर लेप बनाएं और मंत्र द्वारा शुद्ध कर लें। इस लेप का तिलक लगाने से सम्मोहन का चमत्कार प्रत्यक्ष अनुभव होता है। घी, कुआ व मेढासिंगी और जलभांगरा पीसकर मंत्र द्वारा सिद्ध कर लें। यह सम्मोहन के लिए श्रेष्ठ तिलक है।
मदार की जड़ सिंदूर और केले का रस एक साथ पीसकर लेप बनाया जाये, उपरोक्त मंत्र द्वारा प्रभावित करने के बाद इसका प्रयोग सम्मोहन का अद्भुत चमत्कार दिखाता है।
सम्मोहन शक्ति का अंजन – मक्खन, अजारस, श्वेतार्क मूल एक साथ पीस लें तथा मंत्र द्वारा शुद्ध-सिद्ध कर लें।

यह मंत्र सिद्ध लेप अंजन की भांति आंखों में लगाने से सम्मोहक दृष्टि उत्पन्न करता है।

तांत्रिक जड़ी-बूटी वशिकरण प्रयोग what is vashikaran buti

ये भले ही दुर्लभ हों, लेकिन इनका उपयोग बहुत ही आसान है। तांत्रिक विद्या में सिद्धि देने वाले कुछ जड़ी-बुटियों में गुलतुरा से दिव्यता मिलती है, तो तापसद्रुम से भूत-पिशाच और ग्रहों के बूरे प्रभाव को खत्म किया जा सकता है। भोजपत्र में ग्रह बाधाएं दूर करने की शक्ति है। सहदेई, गोरोचन, अपामार्ग और विष्णुकांता में सम्मोहन की क्षमता है। इनके संक्षिप्त विवरण इस प्रकार हैंः-

सहदेई- इस पौधे को उपयोग में लाने से पहले मंत्रोच्चारण के साथ पूजन किया जाता है। इस कार्य को किसी भी रवि-पुष्य योग के दिन सूर्योदय से पहले घर लाकर उसे पंचामृत से स्नान के बाद विधिवत षोडशोपचार पूजा करनी चाहिए। इसका पूजन मंत्र हैः- ऊँ नमो भगवती सहदेवी सदबलदायिनी सर्वंजयी कुरु कुरु स्वाहा!

वशीकरण प्रयोगः सहदेई के पूजन के बाद इसके रस में शुद्ध केसर और गोरोचन मिलाकर गाली बना लेनी चहिए। इस तरह यह गोली वशीकरण और विजयी दिलाने के लिए जादूई टोटके जैसा अचूक असर करता है। गोली को गंगाजल में घिसकर तिलक लगाने और वश में किए जाने वाले व्यक्ति के समझ जाने से उसका वशीकरण सुनिश्चत होगा। इस उपाय के साथ वशीकरण मंत्र का 108 बार जाप भी किया जाना चाहिए। वह मंत्र हैः- ऊँ नमो नारायणाय सर्वलोकान् मम वशं कुरु कुरु स्वाहा! सहदेई को छाया में सुखाकर उसके चूर्ण को पान में डालकर जिस किसी को खिलाया जाए उसका वशीकरण हो जाता है। what is vashikaran buti
संखाहुली की जड़ः यदि आप विपरीत लिंग वाले व्यक्ति का वशीकरण चाहते हैं तो संखाहुली की जड़ का इस्तेमाल करें। इसे पाए जाने वाले स्थान से भरणी नक्षत्र में लाएं और ताबीज बनाएं।
सुदर्शन और कांकरसिंही की जड़ः इसके बारे में संस्कृत में एक श्लोक हैः- करे सौदर्शनं बध्वा राजप्रियो भवेत! संही मूले हरेत्पुष्ये कटि बध्वा नृपप्रियः!! अर्थात सुदर्शन की जड़ को हाथ में बांधने वाला व्यक्ति राज को सम्मोहित कर सकता है। what is vashikaran buti

काकजंघाः जंगली पौधा काकजंघा का उपयोग वशीकरण में तांत्रिक विधि के साथ किया जाता है, लेकिन इसके कुछ टोटके भी हैं।

काकजंघा, तगर, केसर, कमल को पीसकर स्त्री के मस्तिष्क पर लगाया जाए और पैर के नीचे डाली जाए, वह निश्चित तौर आपके वश में हो जाएगी।

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