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May 8, 2019

क्या होता है पितृ दोष, इसे कैसे दूर करे

February 11, 2019

क्या होता है पितृ दोष
ज्योतिष शास्त्र में पितृ दोष का बहुत ही महत्व है। कुंडली  के नवम घर में जब सूर्य तथा  राहू की युति हो रही हो तो यह माना जाता है कि पितृ दोष योग बन रहा है। सूर्य तथा राहू जिस भी भाव में बैठते है, उस भाव के सभी फल नष्ट हो जाते हैं । व्यक्ति की कुण्डली में एक ऐसा दोष है जो इन कई मुसीबतों को एक साथ देने की क्षमता रखता है, इस दोष को पितृ दोष के नाम से जाना जाता है।

जानिए पितृ दोष के बारे में
कुन्डली का नवें घर धर्म का घर कहा जाता है, यह पिता का घर भी होता है, अगर किसी प्रकार से नवां घर खराब ग्रहों से ग्रसित होता है तो आपको बताता है कि पूर्वजों की इच्छाएं अधूरी रह गयीं थीं, जो प्राकृतिक रूप से खराब ग्रह होते हैं वे सूर्य मंगल शनि कहे जाते हैं और कुछ लगनों में अपना काम करते हैं, लेकिन राहु और केतु सभी लगनों में अपना दुष्प्रभाव देते हैं, नवां भाव, नवें भाव का मालिक ग्रह, नवां भाव चन्द्र राशि से और चन्द्र राशि से नवें भाव का मालिक अगर राहु या केतु से ग्रसित है तो यह पितृ दोष कहा जाता है।

इस प्रकार का जातक हमेशा किसी न किसी प्रकार की तनाव में रहता है, उसकी शिक्षा पूरी नहीं हो पाती है, वह जीविका के लिये तरसता रहता है, वह किसी न किसी प्रकार से दिमागी या शारीरिक रूप से अपंग होता है। अगर किसी भी तरह से नवां भाव या नवें भाव का मालिक राहु या केतु से ग्रसित है तो यह सौ प्रतिशत पितृदोष के कारणों में आ जाता है।
क्या हैं पितृ दोष के उपाय
सोमवती अमावस्या को पास के पीपल के पेड के पास जाइये, उस पीपल के पेड को एक जनेऊ दीजिये और एक जनेऊ भगवान विष्णु के नाम का उसी पीपल को दीजिये, पीपल के पेड़ की और भगवान विष्णु की प्रार्थना कीजिये, और एक सौ आठ परिक्रमा उस पीपल की कीजिए। हर परिक्रमा के बाद एक मिठाई जो भी आपके स्वच्छ रूप से हो पीपल को अर्पित करें।

परिक्रमा करते वक्त :ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें । परिक्रमा पूरी करने के बाद फिर से पीपल के पेड़ और भगवान विष्णु के लिये प्रार्थना करें और जो भी जाने अन्जाने में अपराध हुए हैं उनके लिये क्षमा मांगिए। सोमवती अमावस्या की पूजा से बहुत जल्दी ही उत्तम फलों की प्राप्ति होने लगती है।
एक और उपाय है कौओं और मछलियों को चावल और घी मिलाकर बनाये गये लड्डू हर शनिवार को दीजिये। इसके अलावा अपने घर में मांगलिक कार्य होने पर अपने जठेरों व पितरों को जरूर याद करें और उनको भोग लगा लगाएं। श्राद्ध नित्य कर्म करना कभी भी न भूलें, सोमावति अमावस्या के दिन ब्राह्मणों को भोजन करवाए व यथाशक्ति दान जरूर दें। गाय को चारा डालें व प्रतिदिन शिवलिंग को जल चढ़ाते हुए  महामृतुंजय का पाठ जरूर करें।


 पितृ दोष किसी भी प्रकार की सिद्धि को नहीं आने देता है। सफ़लता दूर रहती है और व्यक्ति केवल भटकाव की ओर ही जाता रहता है। लेकिन अगर कोई व्यक्ति माता काली का उपासक है तो किसी भी प्रकार का दोष उसकी जिन्दगी से दूर रहता है। लेकिन पितृ जो कि व्यक्ति की अनदेखी के कारण या अधिक आधुनिकता के प्रभाव के कारण पिशाच योनि मे चले जाते हैं, वे दुखी रहते हैं, उनके दुखी रहने का कारण मुख्य यह माना जाता है कि उनके परिजन ही उन्हें भूल गये हैं और उनकी उनके ही खून के द्वारा मान्यता नहीं दी जाती है। पितर दोष हर व्यक्ति को परेशान कर सकता है इसलिये निवारण बहुत जरूरी है।
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