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ज्येष्ठ मास में विवाह करना चाहिए कि नहीं

April 03, 2018
ज्येष्ठ मास, ज्येष्ठ पुत्र और ज्येष्ठ कन्या ये तीन ज्येष्ठ तीन विवाह संस्कार मे वॢजत माने जाते हैं। परन्तु यदि दो ज्येष्ठ वर्तमान हों अर्थात लड़का-लड़की दोनों ज्येष्ठ यानि बड़े हों, परन्तु महीना ज्येष्ठ के अतिरिक्त हो अथवा लड़का-लड़की में में से एक ज्येष्ठ हो और दूसरा अनुज हो, तो ज्येष्ठ मास में विवाह करने से सामान्य मध्यम फल  प्राप्त होता है। -वराहमीर के अनुसार
तथापि आवश्यक परिस्थितिवश ज्येष्ठ मास में  कृतिका नक्षत्र से सूर्य निकल जाने पर सूर्य दानादि करके विवाह करने में कोई आपत्ति नहीं। भारद्वाज मुनि के अनुसार ज्येष्ठ के महीने की भांति मार्गशीर्ष मास में भी अग्रज लड़का-लड़की एवं मार्ग मास- तीनों का त्याग करें।
 सगे भाई-बहन के विवाह छह मास के भीतर नहीं करने चाहिएं। यदि इस बीच संवत परिवर्तन हो जाए तो कोई दोष नहीं है।-मुनि मार्तंड
पुत्र के विवाह के बाद अपनी कन्या का विवाह 6 महीने तक न करें। इसी तरह विवाह के 6 महीन तक मुंडन, यज्ञोपवीत आदि शुभ कार्य न करें-नारद जी
कन्या के विवाह के 6 महीने के भीतर पुत्र का विवाह करना शुभ है। दो सगी बहनों का विवाह 2 सगे भाइयों से न करें अथवा वर के साथ 2 सगी बहनों की शादी न करें-नारद जी।
2 सगे भाईयों या 2 सगी बहनों का एक संस्कार 6 महीने के भीतर करना सम्भव है। दो सहोदर भाई-बहन के संस्कार आवश्यक स्थिति पैदा होने पर नदी, पर्वत स्थान एवं पुरोहित भेद से एक ही दिन अथवा 6 महीने के भीतर शुभ होंगे। जुड़वे भाई-बहन के मांगलीक कार्य एक ही मंडप में शुभ हैं।
विवाह आदि मंगल कार्य से 6 मास तक लघु मंगल कार्य न करें। यह 6 महीने तक निषेध केवल 3 पीढ़ी तक के मुनष्य के लिए कहा गया है।
मंगल संस्कार के 6 महीने तक पितृकर्म, श्राद्ध आदि न करें। वाग्यदान अर्थात विवाह संबंध का निश्चय हो जाने के बाद वर-कन्या कुल में माता-पिता, भाई आदि निकटस्थ बंधु की मृत्यु हो जाने पर एक वर्ष के बाद विवाह आदि शुभ कार्य करना चाहिए परन्तु अपवाद स्वरूप संकट काल में अथवा अत्यावश्यक परिस्थितिवश एक मास के बाद अथवा सूतक निवृत्ति के बाद जप, पाठ,होम शान्ति एवं यथा शक्ति द्र, वस्त्र गोदानादि के बाद शुभ कार्य किए जा सकते हैं।

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