how to do name ceremony of child

Naamkaran | बच्चे का नामकरण कैसे करते हैं | नामकरण संस्कार

November 17, 2018

Image result for namkaran ceremony

Naamkaran  | बच्चे का नामकरण कैसे करते हैं | नामकरण संस्कार
प्रत्येक मानव के बाहरी व आंतरिक व्यक्तित्व पर उसके परिवेश तथा परिस्थितयों का विशेष प्रभाव होता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार मनुष्य के व्यक्तित्व
पर उसके प्रसिद्ध नाम का विशेष महत्व होता है।
नामाखिलस्य व्यवहार हेतु, शुभावहं कर्मसु भाग्य हेतु ।
नाम्नैव कीर्ति लभतेमनुष्यतत प्रशस्तं खलु नाम कर्म।।
जब एक घर में बच्चे का जन्म होता है तो माता-पिता की इच्छा होती है कि उनके बालक का नाम सर्वश्रेष्ठ हो। उनके बच्चे की प्रसिद्धि दुनियाभर में हो और वह उनका नाम रौशन करे। बच्चे का नाम उसे विशिष्ट पहचान देता है। हिन्दू परिवारों में नामकरण एक महत्वपूर्ण वैदिक परंपरा है।  नामकरण संस्कार के रूप में जाना जाता है।
सूतक समाप्ति पर देशानुसार 10,11,12,13,16,19, व 22 वें दिन नामकरण संस्कार करना चाहिए। एक अन्य मतानुसार ब्राहम्ण को 10 वे या 12 वें दिन, क्षत्रिय को 11 या 12 वें दिन वैश्य को 16 या 20 वें दिन नामकरण करना चाहिए। शुद्र इन तिथियों में कभी भी कर सकते हैं। नामकरण पिता-पितामह या कुल के वृद्ध व्यक्ति के द्वारा स्वस्ति वाचन मंत्रों सहित (विद्वान ज्योतिषि से कुंडली परामर्श के बाद) उच्चारित करवाना चाहिए।  घर की सफाई करने के बाद माता-पिता को स्नान करने के बाद नए वस्त्र  पहने जाते हैं। परिचितों व रिश्तेदारों को बुलाया जाता है। कुंडली व पंचाग देखकर बच्चे के नाम का अक्षर बताया जाता है। बच्चे का पिता या कोई अन्य रिश्तेदार बच्चे के कान में बच्चे का नाम पुकारा जाता है।
बच्चे के पुजारी अाशीर्वाद देते हैं। इसके बाद भोज आयोजित किया जाता है।
शुभ तिथियां 1 (कृष्ण पक्ष), 2,3,7,10,11,12,13, (शुक्ल)।
शुभ वार -चंद्र, बुध, गुरु, व शुक्र।
शुभ नक्षत्र- अश्विनी,रोहिणी, मृग,,पुन, पुष्य, तीनों उत्तरा, हस्त, चित्रा,स्वा, अनु, श्रव, धनि, शत, रेवती।
शुभ लगन- 1,4,7,6,9,12 लग्न शुभ ग्रह युत या दृष्ट हों।
भद्रा, ग्रहण,श्राद दिन, दुष्ट योग, संक्रांति अादि रहित काल में सुयोग्य ज्योतिषी से प्रथम नामाक्षर पूछकर कानों को मधुर लगने वाले अक्षर, महापुरुषों के नाम जैसे अथवा शुभ सार्थक शब्दों वाला  नाम रखना कल्याणकारी रहता है। 
Call us: +91-98726-65620
E-Mail us: info@bhrigupandit.com
Website: http://www.bhrigupandit.com
FB: https://www.facebook.com/astrologer.bhrigu/notifications/
Pinterest: https://in.pinterest.com/bhrigupandit588/
Twitter: https://twitter.com/bhrigupandit588

what is Maha Mrityunjaya mantra

maha mrityunjaya | bhrigupandit | +91 98726 65620

August 07, 2018maha mrityunjaya | bhrigupandit | +91 98726 65620
Mritunjaya is the great gift  given  by lord shiva to mankind. Everyone can get benefit from it. we should know how to chant this mantra. this is the  other name of Lord Shiva. Worshiping and offering prayers to him helps to increase our life span.maha mrityunjaya | bhrigupandit | +91 98726 65620
this mantra has many Benefits:
Chanting mritunjaya mantra bestows prosperity, good health, wealth, and long life. It provides positive vibes and brings peace in life.

maha mrityunjaya | bhrigupandit | +91 98726 65620
Mritunjaya is the great gift  given  by lord shiva to mankind. Everyone can get benefit from it. we should know how to chant this mantra. this is the  other name of Lord Shiva. Worshiping and offering prayers to him helps to increase our life span.maha mrityunjaya | bhrigupandit | +91 98726 65620
this mantra has many Benefits:
Chanting mritunjaya mantra bestows prosperity, good health, wealth, and long life. It provides positive vibes and brings peace in life.

 Maha Mrityunjaya Mantra is the last part of the Rudra Namakam. The entire namakam has its own pattern of “udaatta” – the high pitched tones and the “anudaatta” – the lower tones. These tones cannot be replicated or understood by just looking at the text and reading.maha mrityunjaya | bhrigupandit | +91 98726 65620
 it is better to learn from a Guru who is well versed in Vedas not just in the theory part but one who can actually pronounce them without any loss in the prescribed pitch and tones, preferably a Veda Pandit.
 The same rules apply as to going to a temple. Have a bath, wear clean clothes and sit in a place with minimal distractions. concentrate yourself. it is better if you can only to help with concentration.
mostly Shiva pujas are performed in in the evening at/during sunset. this mantra can also be chanted at the same time. keep your mind free from all the distractions. mantra is fruitful only if you concentrate. the mantras need to be obtained from a Guru because a Guru will know if you are eligible to chant the mantra and will teach you the exact pattern of tones to be uttered while chanting the mantra.
 it is better to learn from a Guru who is well versed in Vedas.
 world famous astrologer bhrigupandit ji  says that if we dont chant Maha Mrityunjaya mantra properly then it could be fruitless. Instead of increasing the life span it might be harmful to the life.maha mrityunjaya | bhrigupandit | +91 98726 65620
 Mrityunjaya Mantra is a must for anyone who is going through difficult problems or diseases in life.
How to chant Mantra
Perform the viniyog and dhyana before you commence the mantra japa (recitation) it is called mantra sanskar which is the basics for the mantra. Then commence the mantra on a Shivaratri day or any maasa Shivaratri which falls on Monday, which we call it as somashivaratri.
you should Sit facing North-East on a Kusha Aasan (it is a mat, available in pooja shops) either at your home or in Shiva temple.
Keep a Mahamrityunjaya Yantra or Rudra Yantra or Sphatika Shivalinga in front of you placed on a red square cloth. Then do Guru pooja, Pancha mahabhuta pooja and Shiva pooja using Rice, unboiled milk, sandal, honey, agarbathi, camphor, jasmine flower.
Take a sankalp for your deired wish to be fulfilled (there are 4 types of mrityunjaya mantra –
To free ourselves from poverty, debt, money issues and low life we use Mrityunjaya Mantra.To heal chronic health problems or life threatening issues we use Mritsanjeevini Mrityunajay Mantra.To free ourselves from diseases and have a good family life and well being we use Maha Mrityunjaya Mantra along with homa.
To continue the power of Mrityunjaya mantra after the mantra siddhi we use laghustotra of Mrityunjaya (it is a shorter version, which we can use after the first complete proficiency)
Chant 125000 times within 21 days. After the japa daily, end it with mangalarthi, mantra pushanjali. After the mantra siddhi (completion of 125000 times) on the end day of sadhana, the sadhaka has to complete with Homam, Bhojanam Tarpanam, Marjanam, and Dhanam.


we know that Mrityunjaya is connected with Shiva, all the rituals, rules, procedures are relaxable since Shiva is appeased by fasting-devotion-focused mantra recitation. if there is something which is unable to followed,  do not worry that is not a issue if you are worshipping Shiva.
Remember, Mrityunjaya Mantra however bad you recite has never given any bad result . The most important aspect for Shiva pooja is Upavasa, Nishte, Upachara meaning Fasting – Dedication and Serving.

Call us: +91-98726-65620
E-Mail us: info@bhrigupandit.com
Website: http://www.bhrigupandit.com
FB: https://www.facebook.com/astrologer.bhrigu/notifications/
Pinterest: https://in.pinterest.com/bhrigupandit588/
Twitter: https://twitter.com/bhrigupandit588

नक्षत्रों के चरण तथा इनके चरणाक्षर

October 13, 2018

Image result for nakshatra charan table hindi

नक्षत्रों के चरण तथा इनके चरणाक्षर

ज्योतिषशास्त्र ने आसानी से समझने के लिए हर नक्षत्र के चार-चार भाग किए हैं, जिन्हें प्रथम चरण, दूसरा चरण, तृतीय चरण व चतुर्थ चरण का नाम दिया गया है।
नक्षत्रों के चरणाक्षर
हरेक नक्षत्र के जो 4-4 चरण होते हैं, उनमें से प्रत्येक नक्षत्र के प्रत्येक चरण को एक-एक नक्षत्र ज्योतिष शास्त्र ने निर्धारित कर दिया है जिस नक्षत्र के जिस चरण में जिस व्यकित का जन्म होता है, उसका नाम उसी जन्मकालीन नक्षत्र के चरणाक्षर पर रखा जाता है। उदाहरण के लिए यदि किसी भी व्यक्ति का जन्म अश्विनी नक्षत्र के दूसरे चरण में होता है तो  उसका नाम इसी नक्षत्र के दूसरे चरण के अक्षर चे से रखा जाएगा। जैसे चेतन्य, चेतक, चेरम आदि। किस नक्षत्र के कौन कौन से अक्षर होते हैं इसे इस टेबल के अनुसार अच्छी तरह से समझा जा सकता है।

नक्षत्र -Constellationचरणाक्षर – 1st Letter वश्य – Vashyaयोनि -Yoniगण -Ganaनाड़ी -Nadi
अश्विनीचू,चे,चो,लाचतुष्पदअश्वदेवआदि
भरणीली,लू,ले,लोचतुष्पदगजमनुष्यमध्य
कृत्तिकाअ,इ,उ,एचतुष्पदमेढ़ाराक्षसअन्त्य
रोहिणीओ,वा,वी,वूचतुष्पदसर्पमनुष्यअन्त्य
मृगशिरावे,वो,का,कीपहले दो चरण चतुष्पद,बाद के दो चरण मनुष्यसर्प्देवमध्य
आर्द्राकु,घ,ड़,छ्मनुष्यश्वानमनुष्यअदि
पुनर्वसुके,को,हा,हीपहले तीन चरण मनुष्य, बाद का एक चरण जलचरमार्जारदेवआदि
पुष्यहू,हे,हो,डाजलचरमेढादेवमध्य
अश्लेषाडी,डू,डे,डोजलचरमार्जारराक्षसअन्त्य
मघामा,मी,मू,मेचतुष्पदमूषकराक्षसअन्त्य
पूर्वाफाल्गुनीमो,टा,टी,टूचतुष्पदमूषकमनुष्यमध्य
उत्तराफाल्गुनीटे,टो,पा,पीपहला चरण चतुष्पद, बाकी तीन मनुष्यगौमनुष्यआदि
हस्तपू,ष,ण,ठमनुष्यमहिषदेवआदि
चित्रापे,पो,रा,रीमनुष्यव्याघ्रराक्षसमध्य
स्वातीरू,रे,रो,तामनुष्यमहिषदेवअन्त्य
विशाखाती,तू,ते,तोपहले तीण चरण मनुष्य, बाद का एक चरण कीटव्याघ्रराक्षसअन्त्य
अनुराधाना,नी,नू,नेकीटमृगदेवमध्य
ज्येष्ठानो,या,यी,यूकीटमृगराक्षसआदि
मूलये,यो,भा,भीमनुष्यश्वानराक्षसआदि
पूर्वाषाढ़ाभू,ध,फ,ढ़पहले दो चरण मनुष्य, बाद के दो चरण चतुष्पदवानरमनुष्यमध्य
उत्तराषाढ़ाभे,भो,जा,जीचतुष्पदनकुलमनुष्यअन्त्य
अभिजितजु,जे,जो,खकोई नहीं हैनकुलकोई नहींकोई नहीं
श्रवणखी,खू,खे,खोपहले दो चरण चतुष्पद, बाद के दो चरण जलचरवानरदेवअन्त्य
धनिष्ठागा,गी,गू,गेपहले दो चरण जलचर, बाद के दो चरण मनुष्यसिंहराक्षसमध्य
शतभिषागो,सा,सी,सूमनुष्यअश्वराक्षसआदि
पूर्वाभाद्रपदसे,सो,दा,दीपहले तीन चरण मनुष्य,बाद का एक चरण जलचरसिंहमनुष्यआदि
उत्तराभाद्रपददू,थ,झ,णजलचरगौमनुष्यमध्य
रेवतीदे,दो,चा,चीजलचरगजदेवअन्त्य

Call us: +91-98726-65620
E-Mail us: info@bhrigupandit.com
Website: http://www.bhrigupandit.com
FB: https://www.facebook.com/astrologer.bhrigu/notifications/
Pinterest: https://in.pinterest.com/bhrigupandit588/
Twitter: https://twitter.com/bhrigupandit588

born in kritika nakshatra

कृतिका नक्षत्र में पैदा होने वाले जातक कैसा होता है

March 20, 2019

कृतिका नक्षत्र में पैदा होने वाले जातक कैसा होता है
ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार नभ मंडल में कुल 27 नक्षत्र हैं। इन नक्षत्रों के स्वामी भी अलग-अलग होते हैं।कृतिका नक्षत्र का स्वामी सूर्य है व देवता अग्नि है।  यह नक्षत्र मंडल का तीसरा नक्षत्र है। हम बात कर रहे हैं कृतिका नक्षत्र की। born in kritika nakshatra.

इस नक्षत्र में पैदा हुए जातक का व्यक्तित्व बहुत ही अकर्षक होता है। देखने में सुंदर और उसके चेहरे पर तेज होता है। साहसी व पराक्रमी भी होता है। जातक बालपन से ही तेज बुद्धि वाला होता है। इसकी विद्या में काफी रुचि होती है और पढ़ने में काफी मन लगाता है।
born in kritika nakshatra.

इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य होने के कारण इसमें सूर्य के गुण होते हैं। आगे चलकर जीवन में जातक प्रसिद्दि पाता है और खूब यश व नाम कमाता है। लेकिन इसका मन चंचल रहता है इस कारण इसके विचार भी बदलते रहते हैं।


कृतिका नक्षत्र में जन्म लेने वाला व्यक्ति खाने का शौकीन एवं अन्य स्त्रियों में आसक्त रहता है। इसका रुझान गायन, नृत्यकला, सिनेमा, तथा अभिनेता और अभिनेत्रियों के प्रति अधिक रहता है।
इस  नक्षत्र में जन्मे जातक या जातिकाएं एक दूसरे के प्रति आकर्षित रहते हैं।  बहु भोगी होना और रोगी होना इस नक्षत्र में जन्मे जातकों का स्वभाव है।


जातक दूसरों के लिए तो बहुत अच्छा ज्ञान देने वाले होते हैं लेकिन उसपर स्वयं कम ही चलते हैं। विवाह के बाद जीवन में भटकाव रुक जाता है और जीवन  सुखी हो जाता है।  जातक का भाग्योदय अक्सर जन्म स्थान से दूर जाकर होता है।  जीवन में यात्राएं करनी पडती हैं। दूर देशों में जा कर ही कृतिका नक्षत्र जातक काफी धन कमाता है। इस  नक्षत्र में जन्मी महिलाएं दुबली लेकिन सुंदर होती हैं।उनका स्वभाव अच्छा होता है और चेहरे पर तेज होता है। इनको सर्दी,जुकाम व अलर्जी जल्दी हो जाती है। इस नक्षत्र के चार चरण होते हैं।

पहला चरण : इस चरण में पैदा होने वाला जातक दूर देशों में जाकर धन कमाता है। इस चरण का स्वामी बृहस्पति है।  जातक की मंगल की दशा, सूर्य एवं गुरु की दशा –अन्तर्दशा अत्यंत शुभ फलदायी होगी।

दूसरा चरण : इस चरण में पैदा होने वाला जातक वैज्ञानिक हो सकता है। विज्ञान में उसकी काफी रुचि होती है। इस चरण का स्वामी शनि  हैं। जातक विद्वान शास्त्रों का ज्ञाता तथा अपने विषय में मास्टर होता है। 

तृतीय चरण :इस चरण में पैदा होने वाला जातक शूरवीर व भाग्यसाली होता है। पराक्रमी होने के कारण किसी भी स्थिति से घबराता नहीं है।  सूर्य और शनि के कारण ज्ञान और अनुभव दोनों का समावेश रहेगा।

चतुर्थ चरण :  इस चरण में पैदा होने वाला जातक लम्बी आयु भोगता है और इसके पुत्र होते हैं। इस चरण का स्वामी बृहस्पति  हैं।  सूर्य और बृहस्पति के प्रभाव के कारण जातक ज्ञानी एवं सात्विक विचारों वाला होता है। 

Call us: +91-98726-65620
E-Mail us: info@bhrigupandit.com
Website: http://www.bhrigupandit.com
FB: https://www.facebook.com/astrologer.bhrigu/notifications/
Pinterest: https://in.pinterest.com/bhrigupandit588/
Twitter: https://twitter.com/bhrigupandit588


लग्न में गुरु कैसा फल देता है

Jupiter position in horoscope

April 05, 2019

लग्न में गुरु कैसा फल देता है
गुरु ग्रह आध्यात्मिकता, धार्मिकता व ज्ञान का प्रतीक है। लग्न में गुरु बैठा हो तो यह जातक को धर्मिक, भावुक बना देता है। ज्ञान पाने की उसकी इच्छा रहती है और अध्यापक, प्रचारक आदि होता है। लग्न में गुरु शुभता का प्रतीक होता है। जातक में अच्छे गुण होने के कारण समाज में लोग उसे आदर देते हैं।

लग्न में बैठा गुरु जातक के लिए अत्यंत शुभफलदायक होता है।लग्न में गुरु की स्थिति से जातक प्रबल रूप से आध्यात्मिक, भावुक आदि कई तरह के शुभ गुणों से युक्त होता है। यदि अन्य ग्रहों के योग ठीक हों तो जातक ज्योतिष व गुप्त विद्याओं में भी जानकारी रखता है।

 लग्न का गुरु कमजोर होने पर शरीर  कमजोर रहता है यानी छोटा कद, दुबला-पतला या भारी शरीर रहता है मगर इसकी पंचम व नवम-सप्तम पर दृष्टि बच्चों, जीवनसाथी व भाग्य के लिए लाभकारी होती है।
साधारणत: लग्न का बृहस्पति निरोगी, दीर्घायु बनाता है, जीवन में संघर्ष देता है मगर अंत में विजयी भी बनाता है।
लग्न में गुरु की स्थिति से जातक के स्वभाव में बड़ापन्न भी होता है जिस कारण ऐसे व्यक्ति से कई लोग सहानुभति रखते हैं। गुरु की दृष्टि शुभ मानी जाती है । यह अपने स्थान से पांचवें सातवें व नौवें स्थान पर विशेष प्रभाव रखता है। यह जातक को संतान, बुद्धि-विवेक, अच्छी सूझ-समझ और ज्ञान प्रदान करता है। गुरु की लग्न से सातवीं दृष्टि सातवें भाव पर पड़ती है जो वैवाहिक जीवन को खुशहाल और समृद्ध बनाती है।

गुरु सौरमण्डल का सबसे बड़ा, वृद्ध और अति शुभ ग्रह है इस कारण जो ग्रह गुरु के प्रभाव में आ जाता है वे भी अच्छा प्रभाव दिखाने लगता है।

Call us: +91-98726-65620
E-Mail us: info@bhrigupandit.com
Website: http://www.bhrigupandit.com
FB: https://www.facebook.com/astrologer.bhrigu/notifications/
Pinterest: https://in.pinterest.com/bhrigupandit588/

Siddhivinayak Mandir Mumbai | Shree siddhivinayak mandir mumbai

February 17, 2019

Image result for siddhivinayak mandir mumbai

Siddhivinayak Mandir Mumbai | Shree siddhivinayak mandir mumbai
सिद्धि विनायक मंदिर मुम्बई में स्थित है। भगवान गणेश जी का यह मंदिर बहुत ही विशाल है और इसकी बहुत ही मान्यता है। यह मुम्बई के प्रभादेवी क्षेत्र में स्थित है। यह एक ऐसा मंदिर है जहां भक्तों की भीड़ हमेशा लगी रहती है। इसे 1801 में लक्ष्मण विट्ठू व देयोबाई पाटिल ने बनाया था। इसकी भव्यता देखते ही बनती है, एक बार जो भक्त आता है वह यहां बार-बार आता है।
गणेश चतुर्थी के उत्सव पर तो यहां मानो मेला ही लगा रहता है। लाल बादशाह गणेश जी के दर्शनों के लिए फिल्म स्टार आते रहते हैं। किसी ने अपनी नई फिल्म का उद्घटन करना हो तो वे यहां गणपति जी का आशीर्वाद लेने के लिए जरूर आते हैं। इस मंदिर की अंदरूनी छत व दीवार को सोने के पत्तरों से बनाया गया है। मंदिर के विशाल दरवाजे लकड़ी के बने हैं जिसमें अष्टविनायक की आकृति बनी है। दुनिया की प्रसिद्ध कम्पनी एपल के सीईओ टिम कुक की भगवान गणेश में बहुत ही श्रद्धा है।

Image result for siddhivinayak mandir mumbai

वे जब भी भारत आते हैं तो मंदिर में आकर गणपति जी का आशीर्वाद जरूर लेते रहते हैं। अमीर भक्तों के दान देने से यह मंदिर मुम्बई का सबसे अमीर मंदिर बन गया है। विदेशों से भी भक्त यहां आते हैं और गणपति जी का अशीर्वाद लेते हैं। अरबों रुपए के चढ़ावे के कारण सरकार ने इस मंदिर में ट्रस्ट बना दिया है जो चढ़ावे के सदुपयोग व प्रबंधों की तरफ ध्यान देता है।

पहले शुरु में यह मंदिर छोटा था लेकिन जैसे-जैसे इसकी मान्यता बढ़ती गई मंदिर विशाल होता गया। मंदिर में फिल्म अभिनेता गोविंदा, शिल्पा शैट्टी, अमिताभ बच्चन, अनिल कपूर, स्व. श्री देवी, डेविड धवन, ऋषि कपूर का सारा परिवार आता रहता है। मंदिर की प्रसिद्धि दिनो-दिन बढ़ती ही जा रही है।

Call us: +91-98726-65620
E-Mail us: info@bhrigupandit.com
Website: http://www.bhrigupandit.com
FB: https://www.facebook.com/astrologer.bhrigu/notifications/
Pinterest: https://in.pinterest.com/bhrigupandit588/
Twitter: https://twitter.com/bhrigupandit588

golu devta temple chitai | golu devta mandir chitai

February 17, 2019

Image result for golu devta temple chitai

golu devta temple dhitai | golu devta mandir chitai
अल्मोड़ा से 8 किलोमीटर दूर चेतई में स्थित है गोलू देवता का मंदिर। उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में अल्मोड़ा जिला चिचई में स्थित गोलू देवता के प्राचीन मंदिर में बंधी लाखों  घंटियां व भक्तों की तरफ से लिखी गईं लाखों चिट्ठियां आपको दर्शा देंगी कि गोलू देवता की यहां के लोगों में कितनी मान्यता है। गोलू देवता न्याय के देवता हैं, लोगों को उनपर बहुत भरोसा है। भारत की न्यायव्यवस्था से दुखी लोग यहां अपने दुखड़े गोलू देव को अपने पत्रों के माध्यम से सुनाते हैं और जब उनकी सुनी जाती है तो वहां घंटिया चढ़ाते हैं।
गोलू देवता को लिखी गई एक चिट्ठी एक महिला ने दिल्ली से लिखी। लिखती है कि हे गोलू देवता मेरे घर पर गुंडों ने कब्जा कर रखा है। पुलिस व न्याय व्वस्था के धक्के खाकर परेशान हो गई हूं । मेरा घर मुझे दिलवा दो । पता नहीं ऐसी कितनी ही लाखों चिट्ठियां यहां गोलू देवता को लिखी गई हैं न्याय के लिए।
 गोलू देव को न्याय का देवता भी कहा जाता है।  गोलू देवता के मंदिर में चिट्ठियों की भरमार देखने को मिलती है। प्रेम विवाह के लिए युवक-युवती गोलू देवता के मंदिर में जाते हैं। मान्यता है कि यहां जिसका विवाह होता है उसका वैवाहिक जीवन हमेशा खुशियों से भरा रहता है।

गोलू देवता की अमर कथा
गोलू देवता उत्तराखंड राज्य के कुमाऊं क्षेत्र की प्रसिद्ध पौराणिक देवता हैं। अल्मोड़ा स्थित गोलू देवता का चितई मंदिर बिनसर वन्य जीवन अभयारण्य से चार किमी दूर और अल्मोड़ा से 8 किमी दूर है। मूल रूप से गोलू देवता को गौर भैरव (शिव ) के अवतार के रूप में माना जाता है।
प्राचीन मान्यताओं के अनुसार ऐसी मान्यता है कि वह कत्यूरी के राजा झाल राय और कलिद्रा की बहादुर संतान थे। ऐतिहासिक रूप से गोलू देवता का मूल स्थान चम्पावत में माना गया है।
दूसरी कथा के अनिसार गोलू देवता चंद राजा, बाज बहादुर ( 1638-1678 ) की सेना के एक जनरल थे और किसी युद्ध में वीरता प्रदर्शित करते हुए उनकी मृत्यु हो गई थी। उनके सम्मान में ही अल्मोड़ा में चितई मंदिर की स्थापना की गई।
चमोली में गोलू देवता को कुल देवता के रूप में पूजा जाता है। चमोली में नौ दिन के लिए गोलू देवता की विशेष पूजा की जाती है। इन्हें गौरील देवता के रूप में भी जाना जाता है।
कहा जाता है कि आज से 15 साल पहले आए तुफान में मंदिर के पास एक विशाल पेड़ था जो कि उखड़ा गया लेकिन भगवान की कृपा रही कि वह मंदिर के ऊपर नहीं गिरा।
आज पूरे उत्तराखंड से भक्त गोलू देव को नमन करने के लिए आते हैं।  छानी के जोशी परिवार के सारे पिरजन इन्हें अपना ईष्ट देव मानते हैं। भक्तों को सपने में दिए गए आदेश के कारण स्व.हरीश चंद्र जोशी व उनके परिजनों ने मासी चौकठिया के पास स्थित छानी गांव में गोलू देवता का सुंदर मंदिर बनाया है जो काफी प्रसिद्द है।
Call us: +91-98726-65620
E-Mail us: info@bhrigupandit.com
Website: http://www.bhrigupandit.com
FB: https://www.facebook.com/astrologer.bhrigu/notifications/
Pinterest: https://in.pinterest.com/bhrigupandit588/

what is Mangal Dosha and its remedies

February 20, 2019

Image result for mangal dosha

what is Mangal Dosha and its remedies

what is Mangal Dosha and its remedies 

Mangal has different effects in houses of horoscope. In first house it is 25% in second house its effect if 50% in fourth house it gives 75% influence and in 7th, 8th and 12 houses it gives 100% results. When we match horoscopes we have to be very careful about Mangalik dhosha.

What is Mangal Dosha ?
you should know that when Mars is placed in 1st, 4th, 7th, 8th or 12th House, the horoscope has a ‘Mangal Dosha’. such person is called a ‘manglik’. Mangal Dosha cannot be ignored. it may cause problems in marital life. It is also very important to analyse the chart and identify whether the kundali has a Mangal Dosha or not. 


If Mars is placed in the 1st House, it will aspect 4th, 7th and 8th Houses. 1st House signifies the character of the person. Hence, a person may be very angry and short tempered. Afflicted 4th House indicates problems associated with house, vehicle, accident due to fire, chemicals, electricity etc. Afflicted 7th House indicates a possibility of obstacles in marital life with spouse, partnership etc. Afflicted 8th House indicates a possibility of fatal accident. So, the placement of Mars in the Ascendant is considered as a drawback.
If Mars is placed in the 4th House, it will affect 7th, 10th and 11th House in addition to 4th House. We have already seen adverse effects of afflicted 4th and 7th Houses. Afflicted 10th House indicates a possibility of frequent changes and disturbances in profession, sleep and issues with father.

Afflicted 11th House indicates possibility of losses due to accidents, thefts etc. So, the placement of Mars in the 4th House is not very well received.
If Mars is placed in the 7th House, it will affect the 10th, 1st and 2nd Houses. 7th is the House of marital life and spouse. So, the presence of Mars in the 7th House indicates turbulent married life. The placement of Mars in the 7th House may gives rise to hardships

If Mars is placed in the 8th House, it will affect 11th, 2nd and 3rd House. The person is prone to fatal accident due to fire, chemicals, electricity etc. Also, afflicted 3rd House may create tensions among siblings. It also makes person very rude and arrogant, and tends to hurt others quite often and may also suffer failures. So, placement of Mars in the 8th house is considered as a drawback.

If Mars is placed in the 12th House, it will affect 3rd, 6th and 7th House. 12th House signifies the spending habits of the person. So, it highlights the fact that the person may go overboard with expenses. A person may be prone to diseases caused due to acidity, hyper tension, diseases related to blood etc. So, the placement of Mars in the 12th House is considered as a drawback.
we should know that Mangal Dosha can cause many problems. But these are very broad guidelines. Many other aspects and angles need to be studied. The overall strength of the horoscope, strength of the planets, benefic aspects, and Mars’ strength must be considered. Exceptions and

cancellation of Mangal dosha

If Mars is in Leo in 8th House
If Mars is in Sagittarius in 12th House.
If boy and girl both are ‘Manglik’

Here are the remedies for the Mangal Dosha. 
Appease Lord shiva in the following manner.
Offer water to Lord Shiva everyday. While worshipping, recite the mantra: Om namoh shivaya Namah 108 times.
Keep Mangal Yantra and perform Mangal Prayer.
Observe fast on Tuesdays.
Perform Kumbh Vivah, Vishnu Vivah or Ashwatha Vivah.
Recite Hanuman Chalisa daily.
Feed birds with sweet.
Give Grass to cow and feed black dogs.
Call us: +91-98726-65620
E-Mail us: info@bhrigupandit.com
Website: http://www.bhrigupandit.com
FB: https://www.facebook.com/astrologer.bhrigu/notifications/
Pinterest: https://in.pinterest.com/bhrigupandit588/

Twitter: https://twitter.com/bhrigupandit588

https://bhrigu-panditlalitmohanblogspotcom.blogspot.com/2019/02/what-is-mangal-dosha-and-its-remedies.html

ज्येष्ठ मास में विवाह करना चाहिए कि नहीं

April 03, 2018
ज्येष्ठ मास, ज्येष्ठ पुत्र और ज्येष्ठ कन्या ये तीन ज्येष्ठ तीन विवाह संस्कार मे वॢजत माने जाते हैं। परन्तु यदि दो ज्येष्ठ वर्तमान हों अर्थात लड़का-लड़की दोनों ज्येष्ठ यानि बड़े हों, परन्तु महीना ज्येष्ठ के अतिरिक्त हो अथवा लड़का-लड़की में में से एक ज्येष्ठ हो और दूसरा अनुज हो, तो ज्येष्ठ मास में विवाह करने से सामान्य मध्यम फल  प्राप्त होता है। -वराहमीर के अनुसार
तथापि आवश्यक परिस्थितिवश ज्येष्ठ मास में  कृतिका नक्षत्र से सूर्य निकल जाने पर सूर्य दानादि करके विवाह करने में कोई आपत्ति नहीं। भारद्वाज मुनि के अनुसार ज्येष्ठ के महीने की भांति मार्गशीर्ष मास में भी अग्रज लड़का-लड़की एवं मार्ग मास- तीनों का त्याग करें।
 सगे भाई-बहन के विवाह छह मास के भीतर नहीं करने चाहिएं। यदि इस बीच संवत परिवर्तन हो जाए तो कोई दोष नहीं है।-मुनि मार्तंड
पुत्र के विवाह के बाद अपनी कन्या का विवाह 6 महीने तक न करें। इसी तरह विवाह के 6 महीन तक मुंडन, यज्ञोपवीत आदि शुभ कार्य न करें-नारद जी
कन्या के विवाह के 6 महीने के भीतर पुत्र का विवाह करना शुभ है। दो सगी बहनों का विवाह 2 सगे भाइयों से न करें अथवा वर के साथ 2 सगी बहनों की शादी न करें-नारद जी।
2 सगे भाईयों या 2 सगी बहनों का एक संस्कार 6 महीने के भीतर करना सम्भव है। दो सहोदर भाई-बहन के संस्कार आवश्यक स्थिति पैदा होने पर नदी, पर्वत स्थान एवं पुरोहित भेद से एक ही दिन अथवा 6 महीने के भीतर शुभ होंगे। जुड़वे भाई-बहन के मांगलीक कार्य एक ही मंडप में शुभ हैं।
विवाह आदि मंगल कार्य से 6 मास तक लघु मंगल कार्य न करें। यह 6 महीने तक निषेध केवल 3 पीढ़ी तक के मुनष्य के लिए कहा गया है।
मंगल संस्कार के 6 महीने तक पितृकर्म, श्राद्ध आदि न करें। वाग्यदान अर्थात विवाह संबंध का निश्चय हो जाने के बाद वर-कन्या कुल में माता-पिता, भाई आदि निकटस्थ बंधु की मृत्यु हो जाने पर एक वर्ष के बाद विवाह आदि शुभ कार्य करना चाहिए परन्तु अपवाद स्वरूप संकट काल में अथवा अत्यावश्यक परिस्थितिवश एक मास के बाद अथवा सूतक निवृत्ति के बाद जप, पाठ,होम शान्ति एवं यथा शक्ति द्र, वस्त्र गोदानादि के बाद शुभ कार्य किए जा सकते हैं।

Call us: +91-98726-65620E-Mail us: info@bhrigupandit.comWebsite: http://www.bhrigupandit.comFB: https://www.facebook.com/astrologer.bhrigu/notifications/Pinterest: https://in.pinterest.com/bhrigupandit588/Twitter: https://twitter.com/bhrigupandit588

संतान प्राप्ति के लिए करें बाल गोपाल या लड्डू गोपाल पूजा

February 05, 2018

Image result for child krishna

www.bhrigupandit.com for more information call or whatsaap +91 98726 65620

संतान प्राप्ति के लिए करें बाल गोपाल या लड्डू गोपाल पूजा
हमारे पास सैंकड़ों जोड़े आते हैं जो कहते हैं कि हमने सारे मैडीकल टैस्ट करवा लिए लेकिन फिर भी संतान नहीं होती। संतान न होना एक गम्भीर समस्या होती जा रही है। कई कपल के और भी  कारण हो सकते हैं। हर डाक्टर से उपचार करवा-करवा कर हार जाते हैं। धन व
समय का नाश होता है। हमारी दिनचर्या ऐसी होती जा रही है कि  हम हर चीज इंस्टैंट मांगते हैं जैसे इंस्टैंट टी, इंस्टैंट फूड व ड्रैस आदि। हम संतान के मामले में भी ऐसा ही व्यवहार करते हैं। एक जोड़ा मेरे पास आया जो अमेरिका में रहता है। लड़का न्यूयार्क में  और लड़की कोलम्बिया
में । दोनों अच्छी पोस्ट पर हैं और अच्छा धन कमाते हैं। महीने में 2 बार ही आपस में मिल पाते हैं। क्या इस परिस्थिति में संतान हो पाएगी।
मैंने उन्हें कहा कि आप बाल गोपाल या लड्डू गोपाल पूजन करवाएं और एक माह की छुट्टी लें। उन्होंने ऐसा ही किया विधिवत पूजन करवाने के बाद वे कामयाब हुए और उन्हें संतान  का सुख मिला। इस प्रकार हजारों लोगों को लाभ हुआ। आप ध्यान रखें कि आप ईश्वर की कृति को जन्म देने वाले हैं और इसके लिए ईश्वर को अपने साथ अवश्य रखें। कोई कारण नहीं कि आपके संतान न हो। संतान सबसे अनमोल है। इसके
बराबर कुछ भी नहीं। बाल गोपाल पूजा प्रेम से करनी या योग्य से करवानी चाहिए। इसके अतिरिक्त कुछ हर्बल मैडीसिन भी हैं जो इस कार्य
के लिए प्रयोग की जा सकती हैं। आइए हम आपको बताते हैं संतान प्राप्ति के लिए बाल गोपाल पूजन या लड्यू गोपाल पूजन। यह पूजा आप विशेष महूर्त देखकर कभी भी करवा सकते हैं।
भाद्रपद की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण के रूप में धरती पर आठवां अवतार लिया था। भगवान स्वयं इस दिन पृथ्वी पर अवतरित हुए थे इसलिए इस दिन को कृष्ण जन्माष्टमी और जन्माष्टमी के रूप में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन मंदिरों में झांकियां सजाई जाती हैं और भगवान कृष्ण को झूला झूलाने की परंपरा भी है। व्रत करने के साथ ही भगवान श्रीकृष्‍ण की पूजा का भी बहुत बड़ा महत्‍व है।
यदा यदा ही धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत !
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानम सृज्याहम !!
अर्थ- जब-जब भी धर्म का पतन हुआ है और धरती पर असुरों के अत्याचार बढ़े हैं तब-तब भगवान ने पृथ्वी पर अवतार लेकर सत्य और धर्म की स्थापना की है।
सबसे पहले निम्‍न मन्‍त्र से अखण्‍ड दिपक जलाना चाहिए और उसके बाद  श्री गणेश पूजन करना चाहिए।
ओम दीपो ज्योति: परब्रह्म दीपो ज्योतिर्जनार्दन:। दीपो हरतु में पापं पूजा दीप नमोस्तु ते।
मंत्र पढ़ते हुए दीप प्रज्ज्वलित करें।
श्री गणेश पूजन
किसी भी पूजा में सर्वप्रथम गणेश जी की पूजा की जाती है। हाथ में पुष्प और अक्षत लेकर निम्‍न मन्‍त्रों से गणपति का ध्यान करें।

गजाननम्भूतगणादिसेवितं कपित्थ जम्बू फलचारुभक्षणम्।
उमासुतं शोक विनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वरपादपंकजम्।

भगवान गणेश का आवह्नन
ॐ गणानां त्‍वा गणापतिहवामहे प्रियाणां त्‍वा प्रियपति ग हवामहे निधीनां त्‍वा निधिपति ग हवामहे वसो मम।
आहमजानि गर्भधमा त्‍वमजासि गर्भधम्।

भगवान श्रीगणेश के आवह्नन के बाद श्रीकृष्‍ण की पूजा कि जाती है। इसके लिए सबसे पहले विनियोग, ध्‍यान, ऋष्यादि न्यास, मंत्र, श्रीकृष्ण स्तुति की जाती है और अंत में गोविंद दामोदर स्तोत्र, श्रीकृष्णाष्टकम् आदि का पाठ किया जाता है। तो आईए करते है भगवान श्रीकृष्‍ण की शास्‍त्रानुसार पूजा।

विनियोग
 ओम अस्य श्रीद्वादशाक्षर श्रीकृष्णमंत्रस्य नारद ऋषि गायत्रीछंद: श्रीकृष्णोदेवता, बीजं नम: शक्ति, सर्वार्थसिद्धये जपे विनियोग
ध्यान
च्ज्चिन्ताश्म युक्त निजदो:परिरब्ध कान्तमालिंगितं सजलजेन करेण पत्न्या।

ऋष्यादि न्यास
नारदाय ऋषभे नम: शिरसि।
गायत्रीछन्दसे नम:, मुखे ।
नमो शिरसे स्वाहा।
श्री कृष्ण देवतायै नम:,
हृदि भगवते शिखायै वषट्।
बीजाय नम: गुह्ये।
वासुदेवाय कवचाय हुम्।
नम: शक्तये नम:, पादयो:।
नमो भगवते वासुदेवाय अस्त्राय फट् ।।
मंत्र
पूजा शुरू करने से पहले सर्वप्रथम कृष्ण द्वादशाक्षर मंत्र का जाप करना चाहिए, जो भी साधक कृष्ण द्वादशाक्षर मंत्र जाप का करता है, उसे संसार के समस्‍त सुख प्राप्त होते है।
ओम नमो भगवते वासुदेवाय नम:
कृष्ण द्वादशाक्षर मंत्र जाप के बाद में भगवान श्रीकृष्‍ण की स्‍तुति करनी चाहिए।
श्रीकृष्ण स्तुति
कस्तुरी तिलकम ललाटपटले, वक्षस्थले कौस्तुभम।
नासाग्रे वरमौक्तिकम करतले, वेणु करे कंकणम।
सर्वांगे हरिचन्दनम सुललितम, कंठे च मुक्तावलि।
गोपस्त्री परिवेश्तिथो विजयते, गोपाल चूडामणी॥
श्रीकृष्‍ण की स्‍तुति के बाद गोविंद दामोदर स्तोत्र का पाठ करना चाहिए।
गोविंद दामोदर स्तोत्र
अग्रे कुरूणामथ पाण्डवानां दु:शासनेनाहृतवस्त्रकेशा।
कृष्णा तदाक्रोशदनन्यनाथा गोविंद दामोदर माधवेति॥
श्रीकृष्ण विष्णो मधुकैटभारे भक्तानुकम्पिन् भगवन् मुरारे।
त्रायस्व माम् केशव लोकनाथ गोविंद दामोदर माधवेति॥
विक्रेतुकामाखिलगोपकन्या मुरारिपादार्पितचित्तवृत्ति:।
दध्यादिकम् मोहवसादवोचद् गोविंद दामोदर माधवेति॥
गोविंद दामोदर स्तोत्र के बाद बड़े ही प्रेम के साथ भगवान श्रीकृष्ण का श्रीकृष्णाष्टकम् पाठ करना बहुत ही उत्‍तम माना गया है।
श्रीकृष्णाष्टकम
(श्री शंकराचार्यकृतम)
भजे व्रजैकमण्डनं समस्तपापखण्डनं
स्वभक्तचित्तरञ्जनं सदैव नन्दनन्दनम् ।
सुपिच्छगुच्छमस्तकं सुनादवेणुहस्तकं
अनंगरंगसागरं नमामि कृष्णनागरम् ॥
मनोजगर्वमोचनं विशाललोललोचनं
विधूतगोपशोचनं नमामि पद्मलोचनम् ।
करारविन्दभूधरं स्मितावलोकसुन्दरं
महेन्द्रमानदारणं नमामि कृष्णवारणम् ॥
कदम्बसूनकुण्डलं सुचारुगण्डमण्डलं
व्रजाङ्गनैकवल्लभं नमामि कृष्ण दुर्लभम् ।
यशोदया समोदया सगोपया सनन्दया
युतं सुखैकदायकं नमामि गोपनायकम् ॥
सदैव पादपङ्कजं मदीयमानसे निजं
दधानमुत्तमालकं नमामि नन्दबालकम्
समस्तदोषशोषणं समस्तलोकपोषणं
समस्तगोपमानसं नमामि नन्दलालसम् ॥
भुवोभरावतारकं भवाब्धिकर्णधारकं
यशोमतीकिशोरकं नमामि चित्तचोरकम् ।
दृगन्तकान्तभङ्गिनं सदासदालसङ्गिनं
दिने दिने नवं नवं नमामि नन्दसंभवम् ॥
गुणाकरं सुखाकरं कृपाकरं कृपापरं
सुरद्विषन्निकन्दनं नमामि गोपनन्दनम् ।
नवीनगोपनागरं नवीनकेलिलंपटं
नमामि मेघसुन्दरं तटित्प्रभालसत्पटम् ॥
समस्तगोपनन्दनं हृदंबुजैकमोदनं
नमामि कुञ्जमध्यगं प्रसन्नभानुशोभनम् ।
निकामकामदायकं दृगन्तचारुसायकं
रसालवेणुगायकं नमामि कुञ्जनायकम् ॥
विदग्धगोपिकामनोमनोज्ञतल्पशायि नं
नमामि कुञ्जकानने प्रवृद्धवह्निपायिनम् ।
यदा तदा यथा तथा तथैव कृष्णसत्कथा
मया सदैव गीयतां तथा कृपा विधीयताम् ॥
प्रमाणिकाष्टकद्वयं जपत्यधीत्य य: पुमान् ।
भवेत्स नन्दनन्दने भवे भवे सुभक्तिमान् ॥

पूजा की समाप्‍ती करने से पहले सभी प्रकार के क्लेश दूर करने वाला, दुख-दरिद्रता से उद्धार करने वाले इस दिव्‍य मन्‍त्र का जाप करना चाहिए। जिन परिवारों में कलह-क्लेश के कारण घर में अशांति का वातावरण रहता हो, वहां घर के लोग जन्माष्टमी का व्रत करने के साथ इस मंत्र का अधिकाधिक जाप करने से ग्रह-क्‍लेश दूर होता है। इस मंत्र का प्रतिदिन जाप करने से परिवार की सारी खुशियां लौट आती है और घर के सभी लौग शांति पूर्वक घर में रहते है।
ओमकृष्णायवासुदेवायहरयेपरमात्मने। प्रणतक्लेशनाशायगोविन्दायनमोनम:ज्ज्
श्रीकृष्ण पूजा की सावधानिया
भगवान श्रीकृष्ण की पूजा में अनेक प्रकार की सावधानीयां रखी जाती है, जिससे आपकी पूजा सफल हो सके। आईए जानते है भगवान श्रीकृष्ण की पूजा में रखी जाने वाली सावधानीयां।
भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति पर पुराने फूल नहीं चढ़ाना चाहिए। श्रीकृष्ण की मूर्ति पर चढ़े बासी फूल हटा लेने चाहिए।  भगवान की मूर्ति पर पुराने फूल नहीं चढ़ाना चाहिए।
फूलों की  माला भी प्रतिदिन बदल देनी चाहिए चाहिए। शास्‍त्रों के अनुसार भगवान श्रीविष्‍णु और बाल गोपल को बिना स्नान और भोग लगाएं स्‍वंय भोजन नहीं करना चाहिए।
भगवान श्रीविष्‍णु और बाल गोपल को बिना स्नान और भोग लगाए भोजन करने से प्रगति नहीं रहती है और परिवार में अनेक प्रकार की परेशानियां आती रहती है।
दूध, दही, घी, शहद और चीनी के मिश्रण से पंचामृत बनाएं और उसे किसी शुद्ध बर्तन में भरें और फिर उसी पंचामृत से भगवान कृष्ण को भोग लगाएं। याद रहें कि कृष्ण बिना तुलसी के भोग ग्रहण कभी नहीं करते हैं।
श्रीकृष्ण की पूजा में भोग लगाया जाता है, उसमें ताजे फल, मिठाइयां, लड्डू, मिश्री, खीर, तुलसी के पत्ते और फल शामिल ज़रूर करें।
भगवान श्रीकृष्ण को सुगंधित धूप बहुत प्रिय हैं। चांदी, तांबे, मिट्टी या किसी अन्‍य धातु से बने दिए में गाय का शुद्ध देसी घी डालकर श्रीकृष्ण की मूर्ति के सामने अवश्य रखे।
भगवान श्रीविष्‍णु का रूप शालिग्राम पर प्रतिदिन एक तुलसी का पत्ता सिर पर चढऩा चाहिए। और भगवान के प्रसाद पर डालकर अर्पित करना चाहिए।
भगवान की पूजा तुलसी के बिना अधूरी मानी जाती है। इस प्रकार की पूजा स्वीकार नहीं मानी जाती हैं।
जब भी बाल गोपाल को भोग लगावे तो पहले यह देख लेना चाहिए कि भोग ज्‍यादा गर्म या ठण्‍डा तो नही है।
भगवान विष्णु ने इस धरती पर कई अवतार लिए, जिनमें से हर अवतार की अपनी खासियत और अपनी महिमा थी। लेकिन अगर सबसे मोहक और सबसे ज्यादा लोकप्रिय अवतार की बात करें तो वह हैं भगवान कृष्ण।
इस प्रकार पूजन करने से भगवान कृष्ण प्रसन्न होते हैं और मनवांछित फल प्रदान करते है

Call us: +91-98726-65620
E-Mail us: info@bhrigupandit.com
Website: http://www.bhrigupandit.com
FB: https://www.facebook.com/astrologer.bhrigu/notifications/
Pinterest: https://in.pinterest.com/bhrigupandit588/
Twitter: https://twitter.com/bhrigupandit588